क्रूड ऑयल में भारी उछाल से वैश्विक बाजार हिल गए; अमेरिकी इंडेक्स तीन महीने के लो पर, डॉलर चरम पर
नई दिल्ली, 9 मार्च (TNA) कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल ने दुनियाभर के शेयर बाजारों को पटखनी दे दी। कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इराक ने तेल उत्पादन में 10-15 प्रतिशत की कटौती का ऐलान किया, जिसके फौरन बाद ब्रेंट क्रूड $85 प्रति बैरल के पार उछल गया, जबकि WTI क्रूड $82 तक पहुंचा। यह उछाल ओपेक+ देशों की आपूर्ति रणनीति का परिणाम है, जो मांग में कमी के बावजूद कीमतों को टिकाए रखने की कोशिश कर रहा है।
इससे प्रभावित होकर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 107.50 के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले तीन महीनों की सबसे ऊंची स्थिति है। मजबूत डॉलर ने उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा दिया, जिसमें भारतीय रुपया भी 83.80 के आसपास कमजोर हुआ। फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अमेरिकी शेयर बाजारों ने सबसे ज्यादा ठेस खाई। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में 2.8% (लगभग 1,100 पॉइंट्स) की गिरावट आई, नैस्डैक 3.2% लुढ़का और S&P 500 2.5% नीचे बंद हुआ। यह तीन महीने का सबसे निचला स्तर है। ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में उछाल आया, लेकिन टेक और कंज्यूमर सेक्टरों में बिकवाली का दौर चला।
भारत में निफ्टी 50 1.5% गिरकर 24,200 पर और सेंसेक्स 1.2% नीचे 79,500 पर बंद हुआ। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां जैसे BPCL और HPCL में 3-5% की तेजी देखी गई, लेकिन IT और बैंकिंग शेयरों पर दबाव रहा। MCX पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स ₹6,800 प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह महंगाई का खतरा है, जो खुदरा पेट्रोल-डीजल कीमतों को 5-7 रुपये बढ़ा सकता है।
मोतीलाल ओसवाल के एनालिस्ट ने कहा, “ओपेक+ की कटौती से सप्लाई चेन बाधित हो रही है। निवेशक सतर्क रहें, गोल्ड और डॉलर जैसे सेफ हैवन में शिफ्ट करें।” दूसरी ओर, जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक मंदी के संकेत मजबूत हो रहे हैं।
ट्रेडर्स के लिए सलाह: शॉर्ट-टर्म में वोलेटाइल रहने की उम्मीद है। लॉन्ग-टर्म निवेशकों को डिप्स में खरीदारी का मौका मिल सकता है। बाजार की नजर अब OPEC+ की अगली मीटिंग और अमेरिकी इन्फ्लेशन डेटा पर टिकी है।
