पश्चिम बंगाल: क्यों ‘डबल इंजन’ अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, आवश्यकता है?

पश्चिम बंगाल: क्यों ‘डबल इंजन’ अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, आवश्यकता है?

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भारत आज जिस आर्थिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, उसमें राज्यों की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक हो गई है। बीते एक दशक में सिर्फ योजनाओं या घोषणाओं वाले पुराने रवैया को समाप्त कर परिणाम देने वाले मॉडल ने जनता के बीच विश्वास जगाया है। ऐसे समय में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या कोई ऐसा विकास मॉडल है, जिसे देश के विभिन्न राज्यों में अपनाकर विकास की गति को तेज किया जा सकता है? मेरा अनुभव कहता है: हां, और इसका एक जीवंत उदाहरण उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। इसी मॉडल से भविष्य की उम्मीद पश्चिम बंगाल की जनता की आंखों में भी मैंने साफ देखी।

स्थिर, सुरक्षित और निवेश-हितैषी वातावरण की आवश्यकता

हाल ही में पश्चिम बंगाल के प्रवास के दौरान मुझे वहां के व्यापारी समाज, उद्योगपतियों और उद्यमियों के साथ विस्तार से संवाद करने का अवसर मिला। इन चर्चाओं में जो सबसे स्पष्ट बात सामने आई, वह थी एक स्थिर, सुरक्षित और निवेश-हितैषी वातावरण की गहरी आवश्यकता।

यह केवल किसी राजनीतिक दृष्टिकोण का प्रतिबिंब नहीं बल्कि उस आर्थिक यथार्थ की अभिव्यक्ति है जिसे जमीनी स्तर पर महसूस किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में व्यापारियों और उद्यमियों ने जिस प्रकार भयमुक्त वातावरण, बेहतर कानून व्यवस्था और निवेश-हितैषी नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया। निश्चित ही इसे केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया के चश्मे से देखना गलत होगा बल्कि यह आर्थिक आकांक्षाओं का संकेत है।

उत्तर प्रदेश के इन बदलावों को बंगाल की जनता भी महसूस कर रही है। यही वजह है कि आज बंगाल में भी ‘डबल इंजन’ की दरकार है। वहां की जनता ‘मोदी-योगी मॉडल’ को सपनों के साकार होने का ‘रोडमैप’ मान चुकी है। यहां यह समझना जरूरी है कि ‘डबल इंजन सरकार’ केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है।

सपनों के साकार होने का ‘रोडमैप’?

उत्तर प्रदेश का उदाहरण इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि कुछ वर्ष पहले तक यह राज्य भी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था। कानून व्यवस्था पर सवाल उठते थे, निवेश सीमित था और औद्योगिक विकास अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था। आज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने एक नई पहचान बनाई है।

इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में तेज़ी से हुए कार्य, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर और उभरते डेटा सेंटर, यह दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश ने विकास को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा बल्कि उसे जमीन पर उतारने का काम किया गया। इसके साथ ही, निवेश आकर्षित करने के लिए बनाई गई नीतियों और पारदर्शी प्रक्रियाओं ने देश-विदेश के निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाया है। निवेश आकर्षित करने के लिए आयोजित इन्वेस्टर्स समिट और उससे जुड़े समझौता ज्ञापनों (MoUs) ने भी यह संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश अब ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ के दौर से बाहर निकल चुका है।


उत्तर प्रदेश के इन बदलावों को बंगाल की जनता भी महसूस कर रही है। यही वजह है कि आज बंगाल में भी ‘डबल इंजन’ की दरकार है। वहां की जनता ‘मोदी-योगी मॉडल’ को सपनों के साकार होने का ‘रोडमैप’ मान चुकी है। यहां यह समझना जरूरी है कि ‘डबल इंजन सरकार’ केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है।

इसका वास्तविक अर्थ है-नीतियों में समन्वय, निर्णय लेने की गति और क्रियान्वयन की प्रभावशीलता। स्वाभाविक है कि जब केंद्र और राज्य एक ही दिशा में काम करते हैं, तो बड़े प्रोजेक्ट्स तेजी से आगे बढ़ते हैं और निवेशकों को स्पष्टता मिलती है। उत्तर प्रदेश में यह तालमेल विकास की गति को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुआ है।

बंगाल में व्यापारी समाज की चिंताओं के संकेत?

पश्चिम बंगाल के संदर्भ में, यह प्रश्न और अधिक महत्वपूर्ण भी हो जाता है। यह राज्य ऐतिहासिक रूप से औद्योगिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध रहा है लेकिन बीते वर्षों में लगातार उद्योगों के पलायन, निवेश की गति और जमीनी स्तर पर व्यापारिक वातावरण को लेकर उठे सवालों ने इसकी संभावनाओं को प्रभावित किया है। इसके चलते व्यापारी समाज की जो चिंताएं सामने आई हैं, वे संकेत देती हैं कि यहां बड़े सुधार की आवश्यकता है।


विकास का मॉडल हर राज्य के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण

मेरे संवाद के दौरान पश्चिम बंगाल के व्यापारी समाज ने जिस स्पष्टता से अपनी बात रखी, वह उल्लेखनीय है। उनकी प्राथमिकताएं बहुत स्पष्ट हैं, भयमुक्त वातावरण, कानून का प्रभावी शासन, पारदर्शी नीतियां और निवेश के लिए अनुकूल माहौल। ये वही कारक हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश को एक नई दिशा दी है। यही वजह है कि आज पश्चिम बंगाल में भी लोग ‘मोदी-योगी मॉडल’ को उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मॉडल ने साबित किया है कि विकास के कुछ मूलभूत सिद्धांत जैसे कि कानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश को बढ़ावा ऐसे हैं जो हर राज्य के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

युवा वर्ग की आकांक्षाएं भी होंगी पूरी

युवा वर्ग की आकांक्षाएं भी इस पूरे विमर्श का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आज का युवा रोजगार के, उद्यमिता के और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भागीदारी के अवसर चाहता है। यदि किसी राज्य में ये अवसर उपलब्ध होंग, तो वह स्वाभाविक रूप से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश में हमने यही प्रयास किया है कि निवेश और विकास के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जाएं।

भारत के विकास की व्यापक दिशा से जुड़ा प्रश्न

यह बहस किसी एक राजनीतिक विचारधारा तक सीमित नहीं है। यह भारत के विकास की व्यापक दिशा से जुड़ा प्रश्न है। इसीलिए मैंने पश्चिम बंगाल के उद्यमियों, युवाओं, महिलाओं और कामगारों से बातचीत में ये पाया कि वे ऐसे मॉडल को अपनाने के लिए तैयार हैं, जो परिणाम देने की क्षमता रखता है। अब वे संभावनाओं के बावजूद पुराने ढर्रे पर ही चलते रहने से ऊब चुके हैं।

विकास की दिशा में ‘डबल इंजन’ प्रभावी माध्यम

निश्चित ही पश्चिम बंगाल के पास आज एक महत्वपूर्ण अवसर है। वहां की जनता विकास, स्थिरता और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्णय लेती है, तो यह राज्य एक बार फिर औद्योगिक और आर्थिक दृष्टि से अग्रणी बन सकता है। ‘डबल इंजन’ इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम बन सकता है लेकिन अंततः निर्णय जनता के हाथ में है। मेरे लिए यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय दृष्टिकोण का हिस्सा है। जब देश का हर राज्य मजबूत होगा, तभी भारत वैश्विक स्तर पर अपनी पूर्ण क्षमता के साथ उभर पाएगा। उत्तर प्रदेश ने एक दिशा दिखाने का प्रयास किया है, अब समय है कि अन्य राज्य भी अपने-अपने संदर्भ में उस दिशा पर विचार करें।

-- नंद गोपाल ‘नंदी’

(लेखक उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई, निवेश प्रोत्साहन मंत्री हैं)

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