विवादों में घिरे केपी सिंह: नियुक्ति से लेकर न्यायालयी फटकार तक उठे कई सवाल
लखनऊ, जून 24 (TNA) उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय में सूचना अधिकारी के पद पर केपी सिंह की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार, उनकी नियुक्ति उस समय हुई जब पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद सामने आया। आरोप है कि आवश्यक योग्यता न होने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार में शामिल होने की अनुमति प्रदान की गई।
मामला न्यायालय पहुँचा, जहाँ एक अन्य अभ्यर्थी ने नियुक्ति को चुनौती दी। दस्तावेज़ के अनुसार, उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने नियुक्ति को निरस्त कर दिया। बाद में खंडपीठ ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा। इसके पश्चात सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने पर भी राहत नहीं मिली और उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया गया।
दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख है कि नियुक्ति के समय प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता को लेकर प्रश्न उठे थे तथा इसकी जांच की आवश्यकता बताई गई थी। हालांकि, इस संबंध में किसी सक्षम जांच एजेंसी के अंतिम निष्कर्ष का उल्लेख उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालयों द्वारा नियुक्ति निरस्त किए जाने के बावजूद केपी सिंह लगातार पुनः पदस्थापना के प्रयास करते रहे। दस्तावेज़ में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने विधानसभा सचिवालय और उसके अधिकारियों के विरुद्ध सार्वजनिक स्तर पर अभियान चलाया, जिसे दस्तावेज़ में “अनर्गल प्रचार” बताया गया है।
पूरे प्रकरण ने नियुक्तियों की पारदर्शिता, योग्यता मानकों और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। वहीं, केपी सिंह का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

