पंडित नेहरू का भी था योग से गहरा नाता पर मोदी ने बनाया वैश्विक ब्रांड

पंडित नेहरू का भी था योग से गहरा नाता पर मोदी ने बनाया वैश्विक ब्रांड

लखनऊ।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहल पर शुरु हुआ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का यह सातवां वर्ष था। संयुक्त राष्ट्र संघ की मोहर लगने के बाद पूरी दुनिया में हर वर्ष 21 जून को इस परंपरा को आगे बढ़ाने का करोड़ों लोग संकल्प लेते हैं। यह कहा जाता है कि योगासन की प्राचीन काल से चली आ रही मान्यता से प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल का भी गहरा नाता रहा।

अब नरेंद्र मोदी ने इसे घर घर पहुंचाने की पहल की है, अर्थात मौजूदा प्रधानमंत्री के पूर्व का 68 साल और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के साथ गुजरे 7 साल के इस सफर के फर्क को समझना जरुरी हो जाता है। नेहरू ने योग परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए विज्ञान से जोड़ने की वकालत की, वही बाबा रामदेव से मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ग्लोबल ब्राण्ड बना दिया है।

योग की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है और इसकी उत्‍पत्ति हजारों वर्ष पहले हुई थी। ऐसा माना जाता है कि जब से सभ्‍यता शुरू हुई है तभी से योग किया जा रहा है। अर्थात प्राचीनतम धर्मों या आस्‍थाओं के जन्‍म लेने से काफी पहले योग का जन्म हो चुका था। योग विद्या में शिव को "आदि योगी" तथा "आदि गुरू" माना जाता है।

इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रुप में एक नया अध्याय जुड़ गया। 27 सितंबर 2014 को पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसकी पहल की थी। इसका परिणाम हुआ कि 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस प्रस्ताव को पूर्ण बहुमत से पारित किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देशों में से 177 सदस्यों ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दी थी। भारत के साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की मंजूरी के बाद 21 जून 2015 को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन भव्य तरीके से किया गया था। पीएम मोदी के नेतृत्व में करीब 35 हजार से अधिक लोगों और 84 देशों के प्रतिनिधियों ने दिल्ली के राजपथ पर योग के 21 आसन किए थे। पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम सद्भाव और शांति के लिए योग थी।

भारत में दूसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में करीब 35 हजार लोग शामिल हुए थे जिसका आयोजन चंडीगढ़ में हुआ था। इस आयोजन का नेतृत्व भी पीएम मोदी ने ही किया था। इस कार्यक्रम में 170 देशों ने हिस्सा लिया जिसकी थीम युवाओं को जोड़ें था। तीसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य आयोजन साल 2017 में लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में किया गया था। मोदी के नेतृत्व में 55 हजार लोगों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया था। तीसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम स्वास्थ्य के लिए योग थी।

चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में सऊदी अरब भी शामिल हुआ था। साल 2018 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान में आयोजित किया गया था। पीएम मोदी के साथ इस कार्यक्रम में करीब 50 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया था। इस अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम शांति के लिए योग थी।

साल 2019 में पांचवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पीएम मोदी रांची पहुंचे थे। इस वर्ष की थीम योगा फॉर क्लाइमेट एक्शन थी। छठा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कोरोना संकट के चलते साल 2020 में वर्चुअल माध्यम से किया गया था। इसकी थीम- योगा फॉर हेल्थ – योगा एट होम थी।

सातवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा- जब भारत ने यूनाइटेड नेशंस में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था, तो उसके पीछे यही भावना थी कि ये योग विज्ञान पूरे विश्व के लिए सुलभ हो। आज इस दिशा में भारत ने यूनाइटेड नेशंस, विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब विश्व को एम योग ऐप की शक्ति मिलने जा रही है। इस ऐप में कॉमन योग प्रोटोकॉल के आधार पर योग प्रशिक्षण के कई विडियोज दुनिया की अलग अलग भाषाओं में उपलब्ध होंगे।

पंडित जवाहरलाल नेहरू का योग से था गहरा नाता

नेहरू का योग से रिश्ता उनके जवानी के दिनों से ही जुड़ गया था। वे योगासनों में सिद्धहस्त थे। उनके पिता मोतीलाल नेहरू की भी योग में रुचि थी। पीयूष बबेले की किताब "नेहरू मिथक और सत्य" में इसका जिक्र है। 28 मार्च 1958 को नेहरू ने बंबई में ईश्वरलाल चुन्नीलाल योगिक हेल्थ सेंटर में कहा: ‘‘30 साल पहले मैं पूना के पास लोनावला में इस सेंटर के मातृ संस्थान कैवल्य धाम योग सेंटर में अपने पिता के साथ आया था। इस सेंटर का मुआयना करते वक्त मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि यह संस्थान योग के क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध कर रहा है। योग निश्चित तौर पर एक पद्धति पर आधारित तंत्र है। यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे जड़ता की तरह स्वीकार किया गया था। अगर हमें इसे समझना है तो हमें वैज्ञानिक पद्धति से इस तक पहुंचना होगा। मैं इस बात से सहमत हूं कि योग पद्धति तब तक तरक्की नहीं कर पाएगी, जब तक कि उसे आधुनिक विज्ञान की रोशनी में जांचा-परखा नहीं जाएगा।

पुस्तक के संदर्भ के मुताबिक जवाहरलाल नेहरू ने - , 19 मई 1958 को कहा, मैं लंबे समय से योग पद्धति के फिजिकल कल्चर में रुचि रखता रहा हूं। कुछ हद तक योगाभ्यास भी करता रहा हूं। मुझे इससे बहुत फायदा हुआ है। मैं इस बात से सहमत हूं कि यह एक मूल्यवान पद्धति है। शुरुआती तौर पर यह शरीर के लिए है, लेकिन यह सिर्फ पहला चरण है। इसका दूसरा चरण मस्तिष्क की ट्रेनिंग का हैै। मैं समझता हूं कि तीसरा चरण चेतना या उसे आप जो भी कहें, वहां तक जाता है। वे अच्छी तरह समझते थे कि आने वाली दुनिया में योग की बड़ी कदर होगी। वो उन शुरुआती लोगों में भी थे, जिन्होंने इस विद्या की पैरोकारी की और इसे विज्ञान की कसौटी पर कसा। योग के मामले में वो अष्टांग योगी भी थे।

इसके संकेत उन तस्वीरों से मिलते हैं, जिनमें नेहरू शीर्षासन करते दिखते हैं। नेहरू सिर्फ कर्मयोगी ही नहीं थे, अष्टांग योगी भी थे। नेहरू कठिन से कठिन योगाभ्यासों में प्रवीण थे। वो रोजाना शीर्षासन करते थे।यही नहीं उनके पिता मोतीलाल नेहरू की भी योग से नाता था।

50 के दशक में नेहरू ने कई अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर योग की पैरवी की थी। 3 अक्टूबर 1958 को कोलंबिया ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम (सीबीएस) के ब्रॉडकॉस्ट जर्नलिस्ट एडवर्ड आर मुरो ने विश्व नेताओं के साथ एक रिकॉर्डिंग की। इसमें फिल्म, रेडियो और टेलीफोन तीनों माध्यमों से रिकॉर्डिंग की गई।

इस कार्यक्रम का प्रसारण 12 अक्टूबर 1958 को ‘स्माल वर्ल्ड’ नाम के प्रोग्राम में किया गया। इस बातचीत में नई दिल्ली से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू शामिल हुए। अमेरिका के पोर्टलैंड मेने से थॉमस ई डेवे शामिल हुए। डेवे 1943 से 1955 तक अमेरिका के न्यूयॉर्क स्टेट के गवर्नर रहे। वह 1944 और 1948 में रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी भी थे।

इसमें नेहरू ने योग के फायदों की चर्चा तो की ही साथ ही इसके फायदों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि योग विश्व शांति में मदद कर सकता है। भारत का हजारों बरस प्राचीन योगाभ्यास ‘शो ऑफ‘ के लिए नहीं है। ये इस शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया में शामिल लोगों के ‘शो इन‘ के लिए है।

वैश्विक व्यापार का शक्ल ले लिया है अब योग परंपरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ही नहीं बल्कि उसके समर्थक बाजारू ताकतों ने भी मिलकर इसे वैश्विक व्यापार में बदल दिया है। कोलकाता विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर और संस्कृत–हिन्दी के विद्वान जगदीश्वर चतुर्वेदी दो टूक कहते हैं कि दरअसल, योग अब आसन नहीं रह गया है। ये अब शासन की क्रिया बन गई है।

मोदी ने सुबह ट्वीट कर आज के दिन के ‘माहात्म्य‘ और उसमें उनके व्यक्तिगत योगदान का बखान किया। उनका ट्वीट है: 21 जून को हम 7वां योग दिवस मनाएंगे। इस वर्ष का विषय ‘योग फॉर वेलनेस’ है, जो शारीरिक और मानसिक कल्याण के लिए योग का अभ्यास करने पर केंद्रित है।

मोदी जी ने ये ट्वीट पोस्ट करने के बाद आज सुबह करीब साढ़े छह बजे योग दिवस राष्ट्रीय कार्यक्रम को वर्चुअल रूप से संबोधित कर कहा कि योग ने मौजूदा कोरोना काल में स्वस्थ रहने में अहम भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले महीने ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो और श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को अलग-अलग पत्र भेज कर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने में उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। मोदी जी ने राष्ट्रपति राजपक्षे को लिखे पत्र में श्रीलंका में पिछले सात बरस से लगातार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह आयोजित करने के लिए भी खास तौर पर आभार व्यक्त किया।

मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति बोल्सनारो को भेजे अलग पत्र में उल्लेख किया कि उनके प्रधानमंत्री बन जाने के बाद ही 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता देने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा की सार्वभौमिक अपील जारी की गई । सरकारी बयानों में ये भी बताया गया कि मोदी सरकार में खेल एवं आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मौके पर देश के नौ राज्यों में 25 ‘फिट इंडिया‘ योग केंद्र शुरू करने की घोषणा की है।

रिजिजू जी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर भविष्यवाणी कर दी कि ये नए केंद्र, लोगों को योग को ‘ फिट जीवन ‘ के तरीके अपनाने ने महती भूमिका निभाएंगे । आयुष मंत्रालय के बयान के मुताबिक सभी सरकारी दूरदर्शन चैनलों पर सुबह 6:30 बजे शुरू इस कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री किरन रिजिजू का संबोधन और ‘मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ‘ के योगाभ्यास का ‘ लाईव ‘ प्रसारण भी हुआ। मंत्रालय के मुताबिक देश के विभिन्न हिस्सों से आई रिपोर्टों से संकेत मिले हैं कि कोविड-19 मरीजों के इलाज में सहायक प्रक्रियाओं के रूप में कई अस्पतालों में योग अभ्यासों को सफलतापूर्वक शामिल किया गया है और योग इस बीमारी से तेजी से ठीक होने में अपना योगदान देता है।

जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष रहे प्रो जगदीश्वर चतुर्वेदी का कहना है :पहले योग ज्ञान का अंग था। इन दिनों उपभोग का हिस्सा है। योग आसन था। अब योग शासन और मुनाफा है। यह योग के महापतन की सूचना है। मैं बाबा रामदेव और मोदी जी से बहुत ख़ुश हूँ कि उन्होंने योग को ‘ग्लोबल ब्राण्ड‘ बना दिया। पूँजीवादी विरेचन का हिस्सा बना दिया। उसे एक माल बना दिया। योग आज कारपोरेट मुनाफा संस्कृति का एक आकर्षक माल है। हम इस प्रश्न पर विचार करें कि योग के वस्तुकरण से हिंदू परंपरा का लाभ हुआ या नुकसान? योग करने के कई फ़ायदे हैं जिनको ‘योगीजन‘ टीवी पर बता रहे हैं।

लेकिन सबसे बड़ा फ़ायदा है कि वह अब सरकारी फ़ैशन, वोट पाने का नारा, सरकारी जनसंपर्क और सरकारी जुगाड़ का अंग बन गया है। पहले योग स्वैच्छिक था, आज माल है।बहरहाल, ये तो तथ्य है कि योग के प्रचार और इवेंट पर जितना धन खर्च किया जा रहा है उतना स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मद में किया जाता तो देश का ज्यादा भला होता। पिछले सात बरस की तरह इस बरस भी मोदी जी के ‘योग इवेंट‘ ने भारी धनराशि बाजार के कर्ताधर्ताओं की तिजोरी में पहुँचा दी है।

(लेखक उत्तर प्रदेश स्थित पत्रकार हैं, विचार उनके निजी हैं)

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