आगरा की प्रसिद्ध बेडई को समर्पित निबंध

आगरा की प्रसिद्ध बेडई को समर्पित निबंध

कोई आगरा परिक्षेत्र में जन्में और बिना बेड़ई खाये मर जाये ये तो हो ही नही सकता।

* आटे से निर्मित सुनहरी तली हुई कवर के साथ भरी मसालेदार दुष्ट दाल का दल है ये। जो सदियों से नशे की तरह दिल दिमाग पर हावी बनी हुआ है।

* हमारा राष्ट्रीय भोजन है ये। सुबह नाश्ते मे इनके दर्शन हो जायें, किसी की मजाल नही जो इन्हे ना कह दे।

* बेड़ई का भूख से कोई लेना देना नही होता। पेट भरा है : ये नियम इस पर लागू नही होता। बेड़ई के सामने दिमाग काम करना बंद कर देता है। बेड़ई को कोई बंदा ना कह दे ऐसे किसी शख्स से मै अब तक मिला नही हूँ।

* बेड़ई में बडी एकता होती है। इनमें से कोई अकेले आपके पेट मे जाने को तैयार नही होती। आप पहली बेड़ई खाते हैं तो आँखे दूसरी को तकने लगती है, तीसरी आपके दिमाग पर कब्जा कर लेती है और दिल की सवारी कर रही चौथी की बात आप टाल नही पाते।

* बेड़ई को देखते ही आपकी समझदारी घास चरने चली जाती हैं। आप अपने डॉक्टर की सारी सलाह, अपने कोलेस्ट्राल की खतरनाक रिपोर्ट भूल जाते हैं। पूरी दुनिया पीछे छूट जाती है आपके और आप इसके पीछे होते हैं।

* बेड़ई को गरम गरम बनते देखना तो और भी खतरनाक है। आप कहीं भी कितने जरूरी काम से जा रहे हो, सडक किनारे किसी दुकान की कढाई मे गरम गरम तेल मे छनछनाती, झूमती सुनहरी बेड़ई आपके पाँव रोक ही लेगी। ये जादूगर होती हैं।

आप को सम्मोहित कर लेती है ये। आप दुनिया जहान को भूल जाते हैं। आप खुद-ब-खुद खिंचे चले आते है बेड़ई की दुकान की तरफ, और तब तक खडे रहते है जब तक दुकानदार दया करके आपको बेड़ई का दौना ना थमा दें।

* किसी मशहूर बेड़ई की दुकान को ध्यान से देखिये, यहाँ जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्रियता, अमीरी, गरीबी का कोई भेद नही होता। बेड़ई से प्यार करने वाले एक साथ धीरज से अपनी बारी का इंतजार करते हैं।

जिन बातो ने हमारे देश की एकता अखंडता बनाये रखने मे मदद की है उनमें बेड़ई को बाइज्जत शामिल किया ही जाना चाहिये ॥

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