आगरा मेट्रो के लिए ट्रैक्शन का काम शुरू, एल एंड टी द्वारा दोनों कॉरिडोर में बिछाई जाएगी थर्ड रेल

आगरा मेट्रो के लिए ट्रैक्शन का काम शुरू, एल एंड टी द्वारा दोनों कॉरिडोर में बिछाई जाएगी थर्ड रेल

आगरा, अप्रैल 8 (TNA) उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन द्वारा आगरा मेट्रो प्रायॉरिटी कॉरिडोर में ट्रैक्शन का काम शुरू हो गया है। बीते माह यूपीएमआरसी द्वारा एल एंड टी को टेंडर अवार्ड किया गया है। बता दें कि 453 करोड़ रुपये की लागत से आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर में थर्ड रेल बिछाने का काम किया जाएगा। फिलहाल, थर्ड रेल से जुड़ा अर्थिंग का काम  ताज ईस्ट गेट स्टेशन पर शुरू हो गया है। 

यूपी मेट्रो के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने कहा है कि अत्याधुनिक तकनीक वाली थर्ड रेल के प्रयोग से आगरा मेट्रो बेहद ही आकर्षक लगेगी। यूपीएमआरसी द्वारा एलएंडटी के लिए दोनों कॉरिडोर में ट्रैक्शन का काम पूरा करने हेतु तीन साल का वक्त निर्धारित किया गया है। वहीं, प्रायोरिटी कॉरिडोर  एवं प्रथम डिपो के लिए 13 महीने में थर्ड रेल बिछाने का लक्ष्य रखा गया है।

ताजनगरी में 29.4 किमी लंबे दो कॉरिडोर का मेट्रो नेटवर्क बनना है, जिसमें 27 स्टेशन होंगे। ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा के बीच 14 किमी लंबे पहले कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर में 13 स्टेशनों का निर्माण होगा। जिसमें 6 एलीवेटिड जबकि 7 भूमिगत स्टेशन होंगे. इस कॉरिडोर के लिए पीएसी परिसर में डिपो का निर्माण किया जा रहा है।  इसके साथ ही आगरा कैंट से कालिंदी विहार के बीच लगभग 16 कि.मी. लंबे दूसरे कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा, जिसमें 14 ऐलीवेटेड स्टेशन होंगे। इस कॉरिडोर के लिए कालिंदी विहार क्षेत्र में डिपो का निर्माण किया जाएगा।

फिलहाल, थर्ड रेल से जुड़ा अर्थिंग का काम ताज ईस्ट गेट स्टेशन पर शुरू हो गया है। इसके बाद डिपो परिसर सहित रिसीविंग सर्विस स्टेशन (RSS) में भी जल्द काम शुरू किया जाएगा।  मेट्रो प्रणाली में थर्ड रेल एक नवीनतम जर्मन तकनीक है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन द्वारा कानपुर मेट्रो में थर्ड रेल तकनीक का प्रयोग सफलतापूर्वक किया जा रहा है। बता दें कि पारंपरिक तौर पर रेलवे सहित विभिन्न मेट्रो सेवाओं में ट्रेन को ऊर्जा देने के लिए ओएचई का प्रयोग किया जाता है।

इस प्रणाली में खंबों की मदद से बिजली की लाइन ट्रैक के ऊपर होकर गुजरती है, ट्रेन का इंजन पेंटोग्राफ की मदद से इसी ओएचई से ऊर्जा लेकर ट्रेन का आगे बढ़ाता है। वहीं, थर्ड रेल प्रणाली में ट्रैक के समानांतर एक रेल (पटरी) का प्रयोग किया जाता है जिसे थर्ड रेल कहते हैं। थर्ड  रेल प्रणाली में इसी थर्ड रेल की मदद से ट्रेन को उर्जा मिलती है। वहीं, थर्ड रेल के प्रयोग से कॉरिडोर भी बेहद आकर्षक नजर आता है।

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