सरकारी विभागों को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए मोदी सरकार का एक बार फिर 'रिटायर फरमान'

सरकारी विभागों को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए मोदी सरकार का एक बार फिर 'रिटायर फरमान'

कोरोला संकटकाल में लापरवाह और भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों के लिए मोदी सरकार ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है । यह कोई पहला मौका नहीं है जब केंद्र सरकार ने ऐसे गैर जिम्मेदाराना कर्मचारियों के लिए ऐसा प्लान तैयार किया है । हम आपको बता दें कि वर्ष 2014 में केंद्र की सत्ता पर जब मोदी सरकार काबिज हुई थी तभी से सरकारी विभागों को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए नीति अपनाई गई थी । अभी तक 6 वर्षों में केंद्र की भाजपा सरकार ने ऐसे सैकड़ों अधिकारियों-कर्मचारियों को जबरन रिटायर कर दिया है । केंद्र की नीतियों का पालन करते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी अपने यहां बड़े पैमाने पर राज्य के सरकारी कर्मचारियों को समय से पहले ही जबरन रिटायर दे दिया था । केंद्र सरकार के इस नए फरमान से सरकारी विभागों में हड़कंप मचा हुआ है ।

इसको लेकर मोदी सरकार ने ऐसे सरकारी कर्मचारियों की पहचान करने के निर्देश भी दे दिए हैं । साथ ही मोदी सरकार भ्रष्ट और अयोग्य कर्मचारियों को रिटायर करने पर भी जोर दे रही है । केंद्र की मोदी सरकार सरकारी कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच करने वाली है । इसके लिए सरकार ने दिशा-निर्देश भी दे दिए हैं । इसके तहत अक्षमता और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की जाएगी । वहीं जो लोग भ्रष्ट, पाए जाते हैं, उन्हें सेवानिवृत्त किया जाएगा । भ्रष्ट, और सुस्त अधिकारियों की सूची को केंद्र सरकार अंतिम रूप देने की तैयारी में जुटी हुई है ।

केंद्र सरकार के निर्देश के बाद कार्मिक विभाग रजिस्टर बनाने में जुटा

केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश जारी होने के बाद कार्मिक विभाग ऐसे लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों के लिए रजिस्टर बनाने में जुट गया है । केंद्र सरकार का कहना है कि सर्विस रिकॉर्ड जांच के बाद तय किया जाएगा कि वो सही से काम कर रहे हैं या उन्हें लोकहित में समय से पहले रिटायर किया जाए । वहीं कार्मिक मंत्रालय ने सभी सचिवों से कहा कि इसके लिए रजिस्टर तैयार करे, जिसमें यह सभी जानकारी दर्ज की जाए ।

इसके तहत केंद्र सरकार ने सरकारी सेवा में 30 साल पूरे कर चुके या 50-55 साल की उम्र के कर्मचारियों की सेवा रिकॉर्ड की जांच करने के लिए कहा है । केंद्रीय संस्थानों से ऐसे अधिकारियों की रिपोर्ट मांगी गई थी। कोरोना संक्रमण के दौरान इन अधिकारियों की फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं। वजह उस समय इन मामलों के लिए रिप्रेजेंटेशन कमेटी गठित नहीं हो पाई थी। अब केंद्र ने कमेटी का नए सिरे से गठन कर दिया है ।

केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकारों ने भी यह नियम लागू कर रखा है

मोदी सरकार अपने इस कदम से मौजूदा व्यवस्था में सुधार लाना चाहती है। गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अपने 27 सीनियर अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट पर भेज दिया था। केंद्र की भ्रष्टाचार मुक्त सरकारी विभागों की तर्ज पर ही कई राज्य सरकारों ने भी यह नियम लागू कर रखा है । पिछले साल उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब छह सौ अफसरों को जबरन रिटायरमेंट देने का फैसला किया था।

उत्तर प्रदेश के बाद दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, असम और त्रिपुरा के मुख्यमंत्रियों ने भी केंद्र की तर्ज पर अपने प्रदेशों में भ्रष्ट अधिकारियों को रिटायर करने का फरमान सुनाया था । बता दें कि अब केंद्र सरकार दो साल से तो ऐसे अधिकारियों के वर्क रिपोर्ट हर तीसरे महीने मंगा रही है । बता दें कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से बहुत सी ऐसी योजनाएं हैं, जो अफसरों की लापरवाही के चलते समय पर पूरी नहीं हो पाती हैं। यही वजह है कि अब केंद्र सरकार अक्षम व भ्रष्ट अधिकारियों को समय से पहले घर भेज रही है।

- शंभू नाथ गौतम

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