ऐक्सिडेंट से ऑटो चलाना छूटा, अपाहिज हुए तो उम्मीद ने अपनाया

ऐक्सिडेंट से ऑटो चलाना छूटा, अपाहिज हुए तो उम्मीद ने अपनाया

कुछ दिन पहले राकेश कुमार जो लखनऊ में ऑटो चलाते थे । उनका आलमबाग क्षेत्र में ऐक्सिडेंट हो गया था । पैर में काफ़ी चोट आ गयी और सरकारी हस्पताल में भर्ती हो गए । कोई साथ में न होने के कारण तकलीफ़ में दर्द से भरे हस्पताल से डिस्चार्ज कर दिए गए और फिर लावारिसों की तरह गोमती बेराज पर बहुत दर्द में ज़िंदगी बिताने लगे।

सोचिए एक अच्छा ख़ासा व्यक्ति तकलीफ़ के समय अकेला हो गया और कभी लोगों को अपनी ऑटो से मंज़िल तक पहुँचाने वाला आज खुद ही लावारिस की तरह सड़कों पर दर्द से करहा रहा है । कुछ जागरूक और दयावान लोग अभी भी समाज में है जिनके कारण ज़िंदगी और अच्छाई का अस्तित्व है ।

वोमेन आर्मी ट्रस्ट की कुछ महिलायें रश्मि सिंह एवं एकता खत्री ने राकेश कुमार जी को सड़क से उठाया और हस्पताल में भर्ती कराया और फिर उम्मीद संस्था से सम्पर्क किया जिससे इस व्यक्ति को आइस्थाई रूप से शेल्टर दिया जा सके । उम्मीद संस्था निरंतर ऐसे लोगों की मद्दत के लिए आगे खाड़ी रहती है एवं तुरंत राकेश कुमार को उम्मीद संस्था द्वारा संचालित नगर निगम के जियामउ रैन बसेरे में लिया गया ।

अब राकेश कुमार जिनका इलाज शुरू हो चुका है और उनकी दवाइयाँ निरंतर उनको दो जा रही है । उम्मीद है कि जल्द ही वह स्वस्थ हो जाएँगे एवं ठीक होकर पुनः अपनी मज़दूरी शुरू कर सकेंगे। भले ही उनके परिवार में कोई नहीं है परंतु अब वह उम्मीद में आकर लावारिस नहीं है ।

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