बलिया जिला जेल में बवाल, बंदियों का पथराव, आंसू गैस के गोले छोड़े

बलिया जिला जेल में बवाल, बंदियों का पथराव, आंसू गैस के गोले छोड़े

कुछ दिनों तक शांत रहने के बाद बलिया जिला कारागार बुधवार की देर शाम एक बार फिर अशांत हो गया। कारागार में निरुद्ध बंदियों ने किसी बात को लेकर अचानक उत्पात मचाते हुए पथराव शुरु कर दिया। हालात बेकाबू होते देख जेल प्रशासन की सूचना पर पुलिस व पीएसी के जवानों को स्थिति पर नियंत्रण करने के लिये जेल के अंदर भेजा गया। थोड़ी ही देर में डीएम अदिति सिंह व एसपी डा. विपिन ताडा भी कई थानों की फोर्स के साथ पहुंच गए।

जेल प्रशासन के खिलाफ अचानक उग्र हुए कैदियों ने हंगामा मचाना शुरु कर दिया। पहले तो जेल के अधिकारियों ने खुद से ही हालात पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो मामले से पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया।

खबर मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी पुलिस व पीएसी के जवानों के साथ पहुंच गये। जवानों पर पथराव कर रहे बंदियों को काबू करने के लिये पुलिस फोर्स बंदियों पर टियर गैस छोड़ रही थी। घटना को लेकर जेल अधीक्षक से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली।

करीब एक घंटे तक जिला कारागार में बंदियों का हंगामा चलता रहा। सूचना पर डीएम अदिति सिंह व एसपी डा. विपिन ताडा के अलावा कई थानों की पुलिस पहुंच गयी। पिछले दिनों अन्य जेलों में हुए बवालों की पुनरावृत्ति न हो, इसके मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया। अधिकारियों के पहुंचने के कुछ देर बाद ही अंदर से हंगामे की आवाज आनी बंद हो गयी थी। हालांकि देर तक अधिकारी अंदर ही जमे हुए थे।

जिला कारागार में बुधवार की शाम को जो कुछ भी हुआ, वह अचानक नहीं था। जेल के सूत्रों की मानें तो इसकी पटकथा पिछले तीन-चार दिनों से लिखी जा रही थी। बुधवार की देर शाम को मिलान के बाद वापस बैरक में जाने की बजाय बंदियों ने हंगामा शुरू कर दिया। जेल परिसर में इधर-उधर जमा पत्थरों को बंदी चलाने लगे तो बदले में उनपर नियंत्रण के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। हालात पर काबू पाने के लिएच पीएसी भी जेल के अंदर घुसी। करीब 45 मिनट बाद जेल के अंदर से बवाल का शोरगुल आना बंद हो गया था।

जेल में पिछले दिनों हुए बवाल व एक बंदी के कारागार की दीवार फांदकर भाग जाने का मामला हुआ था। जांच के बाद जेल अधीक्षक प्रशांत मौर्य का तबादला हो गया था। जेल सूत्रों की मानें तो नए अधीक्षक यूपी मिश्र ने यहां आने के बाद सख्त तेवर अख्तियार किए। सुविधा शुल्क के जरिए बंदी मोबाइल का इस्तेमाल धड़ल्ले से करते थे। शासन के निर्देश पर जेल में ही पीसीओ का इंतजाम कर दिया गया, ताकि बंदी समय-समय पर अपने घर बात कर सकें। इस व्यवस्था से बंदियों को आपत्ति थी।

इसके अलावा चेकिंग आदि में सख्ती को लेकर भी बंदियों में आक्रोश था। हालांकि सूत्रों का यह भी कहना है कि बंदियों व कर्मचारियों की गुटबाजी ने भी इस आक्रोश को हवा दिया। इसके बाद बुधवार की शाम को आक्रोश ने हंगामा का रूप अख्तियार कर लिया। शाम की मिलान के बाद ही बंदियों ने हंगामा करते हुए पथराव शुरू कर दिया। बदले में पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई लेकिन आसपास मौजूद लोगों की मानें तो बंदियों को काबू में करने के लिए पुलिस को ऐसा करना पड़ा। करीब 45 मिनट बाद जेल का हंगामा थम गया था लेकिन डीएम-एसपी अंदर ही जमे हुए थे।

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