गुम था कानपुर में लाड़ला, लौटा तो भर आईं मां की आंखें, पुलिस बनी फरिश्ता

गुम था कानपुर में लाड़ला, लौटा तो भर आईं मां की आंखें, पुलिस बनी फरिश्ता

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कानपुर, मई 12 (TNA) कहते हैं, मां की दुआ में वो असर होता है जो पत्थर को भी मोम बना दे। यही चमत्कार देखने को मिला कानपुर देहात के सट्टी क्षेत्र में, जब एक मां की आंखों के आंसू और पुलिस की कर्मठता ने मिलकर खोए हुए मासूम को सही सलामत घर पहुंचाया।

मरूआ शाहजहांपुर निवासी चन्द्रप्रकाश उर्फ पिन्टू का 11 वर्षीय पुत्र आयुष रविवार की रात अचानक लापता हो गया। जैसे ही ये खबर फैली, पूरे गांव में मायूसी की लहर दौड़ गई। मां शिल्पी देवी की हालत ऐसी हो गई जैसे किसी ने उसकी दुनिया छीन ली हो। माथे पर गंगाजल छिड़कती, मंदिर के घंटे बजाती, हर देवी-देवता से अपने लाल की सलामती की भीख मांगती फिर रही थी। इधर सट्टी थाने की पुलिस ने इस दर्द को एक कर्तव्य नहीं, एक इबादत मानते हुए आयुष की तलाश शुरू की। गांव-गांव, चौपाल-चौपाल, खेत-खलिहानों से लेकर नदियों के किनारे तक छान मारे। पुलिसकर्मी न सिर्फ वर्दीधारी सेवक थे, बल्कि उस घड़ी मां के दूत बन गए थे।

आखिरकार, पुलिस की मेहनत रंग लाई। आयुष सट्टी क्षेत्र के गौरीकरण गांव के बाहर एक पुलिया के पास सुरक्षित मिला। जैसे ही मां शिल्पी ने उसे अपनी गोद में लिया,यह दृश्य ऐसा था मानो स्वयं भगवान ने धरती पर उतरकर इस मिलन को संजोया हो। वहां मौजूद हर आंख नम थी, पर उन आंसुओं में डर नहीं, सिर्फ राहत और आभार था।

वही बेटे को गले लगाकर भावुक मां ने पुलिस को धन्यवाद दिया, जिनकी मदद से उनका खोया बेटा मिला। परिवार की आंखों में खुशी के आंसू थे। पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता से एक परिवार फिर से एकजुट हो सका। समाज ने भी प्रशंसा की।

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