कानपुर में वर्दी, हूटर और डर का खेल: नकली पुलिस बनकर लूटने वाला गैंग का हुआ खुलासा
कानपुर, मई 18 (TNA) पुलिस की वर्दी पहनकर छापेमारी करने और लोगों से जबरन वसूली करने वाला एक शातिर गैंग पकड़ा गया है। यह गिरोह खुद को एसटीएफ और क्राइम ब्रांच का अफसर बताकर आम लोगों को निशाना बना रहा था। शनिवार को रावतपुर इलाके में इन्होंने एक घर में घुसकर नकदी और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए लाखों रुपये वसूले। लेकिन असली पुलिस समय पर पहुंच गई और पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।
रावतपुर निवासी अंबिका सिंह चंदेल के घर शनिवार को करीब आठ लोग पुलिस की वर्दी में घुसे। उन्होंने घरवालों से कहा कि वे एसटीएफ से हैं और पूछताछ के नाम पर मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि आरोपियों ने महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया और परिवार को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर 1.40 लाख रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए।
घटना के बाद पीड़ितों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस को देखकर फर्जी अफसर भाग निकले, लेकिन घेराबंदी कर पांच लोगों को पकड़ लिया गया। पूछताछ में इनकी पहचान हुई और इनके आपराधिक कारनामों का खुलासा हुआ।
गिरफ्तार आरोपियों में राजीव दीक्षित (कानपुर), वर्षा चौहान (औरैया), अरविन्द्र शुक्ला (कानपुर), अनिरुद्ध उर्फ विनय यादव (कानपुर देहात) और अनुज उर्फ डम्पी यादव (कन्नौज) शामिल हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गैंग में एक ट्रैफिक दरोगा, होमगार्ड और महिला पीआरडी जवान भी शामिल हैं। मुख्य आरोपी दरोगा अब भी फरार है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गैंग पहले भी हनुमंत बिहार इलाके में छापा मारकर ढाई लाख रुपये की वसूली कर चुका है। ये लोग हूटर लगी गाड़ी, नकली पहचान पत्र और वर्दी का इस्तेमाल कर खुद को असली अफसर साबित करते थे।
फिलहाल पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और फरार मुख्य आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस इस गैंग से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है। पकड़े गए आरोपियों से मिले दस्तावेज और सामानों से कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।