'एक सरकारी बाबू के नोट्स’ किताब का प्रयागराज में हुआ विमोचन

'एक सरकारी बाबू के नोट्स’ किताब का प्रयागराज में हुआ विमोचन

प्रयागराज, नवम्बर १६ (TNA) “पितृ ऋण या मातृ ऋण से उऋण नहीं हुआ जा सकता पर उस रास्ते पर एक-दो क़दम चला तो जा ही सकता है।मुझे तो सौ श्राद्धों पर भारी लग रही है एक अकेली यह क़िताब”। ये बात गीतकार यश मालवीय ने ‘एक सरकारी बाबू के नोट्स’ नाम की किताब के विमोचन के मौक़े पर कही। यह किताब एजी ऑफिस में कार्यरत रहे वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी माधव प्रसाद सिंह की लिखी हुई है। इस पुस्तक का प्रकाशन उनके निधन के बाद हुआ है।

स्वर्गीय एमपी सिंह देश के जाने माने खेल पत्रकार शिवेंद्र कुमार सिंह के पिता जी थे। प्रयागराज के रहने वाले शिवेंद्र कुमार सिंह इस समय दिल्ली में राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल TV9 भारतवर्ष में बतौर स्पोर्ट्स एडिटर के पद पर है। इस मौके पर शिवेंद्र कुमार सिंह भी मौजूद रहे।

यश मालवीय ने इस मौक़े पर लेखक को याद करते हुए कहाकि - बाबू साहब नामवर सिंह और शिवप्रसाद सिंह जी के बहुत चहेते थे।पिता के मित्र के नाते यह बहुत अपना सा रिश्ता मुझे विरसे में मिला था।मेहदौरी में ही रहते थे।गंगा के रास्ते आते-जाते अक्सर मिल जाया करते थे।उन्हें आता देखकर ऐसा लगता था जैसे साकार बनारस ही सामने से चला रहा हो।बहुत प्यारी हिदायतों के साथ मिला करते थे।जाड़ा हो तो कहते स्वेटर कम पहन रखे हो।गर्मी हो तो कहें बहुत लू चल रही है, काहे नहीं एक गमछा सिर पर डाल लिये।शराफ़त और सज्जनता जैसे शब्द तो जैसे उन्हीं के लिये बने थे।

मूलतः बनारस के रहने वाले माधव प्रसाद सिंह ने इस किताब में अपने बचपन, शुरूआती शिक्षा, आर्थिक चुनौतियों के बीच शिक्षा को लेकर अपनी यादें इस पुस्तक में संजोया है।

शहर के जाने माने रंगकर्मी प्रवीण शेखर ने कहाकि ये किसी एक सरकारी अधिकारी के लिखे नोट्स भर नहीं हैं ये हमारे संस्कार हैं। ये ऐसा समय है जो सांस्कृतिक और सामाजिक स्मृतिलोप है। इस लिहाज़ से ये किताब हम सभी के लिए उपयोगी है। कहते हैं कि व्यक्ति के किसी भी व्यक्ति के जीवन में सपने हो और स्मृतियाँ हों तो जीवन सफल हो जाता है।

मूलतः बनारस के रहने वाले माधव प्रसाद सिंह ने इस किताब में अपने बचपन, शुरूआती शिक्षा, आर्थिक चुनौतियों के बीच शिक्षा को लेकर अपनी यादें इस पुस्तक में संजोया है। किताब की भूमिका में प्रख्यात साहित्यकार ममता कालिया ने लिखा है कि - “सिंह साहब भी कई सुबह टहलने के बाद कुछ देर के लिए हमारे घर आ जाते। उनका घर हमसे एक सड़क आगे था। सिंह साहब का घर अलग तरीके से बना हुआ था, जिसमें उन्होंने अपने परिवार की जरूरत के हिसाब से इफरात कमरे बनवा रखे थे। सिंह साहब बहुत सज्जन व्यक्ति थे। एजी ऑफिस में काम करते थे। उन्हें अंग्रेजी साहित्य के उद्धरण सुनाने का बड़ा शौक था।”

इस मौक़े पर माधव प्रसाद सिंह के परिजनों और उनके कार्यालय के पूर्व सहयोगियों ने भी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी।

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