आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26: आत्मविश्वास, स्थिरता और विकास की नई ऊँचाइयों पर भारत

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26: आत्मविश्वास, स्थिरता और विकास की नई ऊँचाइयों पर भारत

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नई दिल्ली, जनवरी 29 (TNA) आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 भारत की अर्थव्यवस्था की उस कहानी को सामने रखता है, जिसमें संकटों के बीच अवसर गढ़ने की क्षमता, नीतिगत स्थिरता और जनसामान्य की भागीदारी साफ़ झलकती है। वैश्विक स्तर पर जहां मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, वहीं भारत ने न केवल खुद को स्थिर रखा है, बल्कि तेज़ी से विकास के नए मानक भी स्थापित किए हैं।

सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.3 से 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे भारत लगातार चौथे वर्ष दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। वहीं वित्त वर्ष 2026–27 (FY27) के लिए भी 6.8 से 7.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जो भारत की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को दर्शाता है।

इस विकास का सबसे मजबूत आधार घरेलू मांग है। FY26 में निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) की हिस्सेदारी बढ़कर जीडीपी के 61.5 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो पिछले एक दशक का उच्चतम स्तर है। निजी उपभोग में यह वृद्धि आम नागरिक की बढ़ती क्रय शक्ति और आर्थिक विश्वास को दर्शाती है। महंगाई पर नियंत्रण इस भरोसे का एक अहम कारण रहा है। अप्रैल–दिसंबर FY26 के दौरान औसत महंगाई दर 1.7 प्रतिशत रही, जिसने आम परिवारों को वास्तविक राहत प्रदान की।

निवेश के मोर्चे पर भी तस्वीर उत्साहजनक है। सकल स्थिर पूंजी निर्माण FY26 की पहली छमाही में 7.6 प्रतिशत बढ़ा और निवेश का स्तर जीडीपी के लगभग 30 प्रतिशत पर बना रहा। विनिर्माण क्षेत्र ने पहली छमाही में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि सेवा क्षेत्र के FY26 में 9.1 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है, जो व्यापक और संतुलित विकास को दर्शाता है।

बाह्य क्षेत्र में भी भारत की स्थिति सशक्त बनी हुई है। FY25 में वस्तु एवं सेवा निर्यात रिकॉर्ड 825.3 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जबकि FY26 की पहली छमाही में सकल एफडीआई प्रवाह में 19.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही, विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 701 अरब डॉलर पर पहुँच चुका है, जो 11 महीनों से अधिक के आयात के लिए पर्याप्त है।

राजकोषीय मोर्चे पर अनुशासन और सुधार साथ-साथ आगे बढ़े हैं। केंद्र का राजकोषीय घाटा FY26 में जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है, वहीं प्रत्यक्ष कर आधार के विस्तार और जीएसटी संग्रह में निरंतर वृद्धि ने राजस्व स्थिति को मजबूत किया है।

कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 यह स्पष्ट करता है कि भारत का विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थिर नीतियों, सशक्त संस्थानों और आम नागरिक की भागीदारी से संचालित एक व्यापक परिवर्तन की कहानी है। यही आत्मविश्वास भारत को भविष्य की वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में मजबूती से आगे ले जा रहा है।

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