आगरा में ग्रेटर फ्लेमिंगो और लेसर फ्लेमिंगो का झुंड उतरा जोधपुर झाल में

आगरा में ग्रेटर फ्लेमिंगो और लेसर फ्लेमिंगो का झुंड उतरा जोधपुर झाल में

जैसा आप मे से अधिकांश लोग जानते ही हैं कि आगरा में स्थानीय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षी अभ्यारण सूर सरोवर पक्षी विहार है जो कीठम झील के इर्दगिर्द बसा है। कीठम झील लगभग 7.92sq किमी में फैली एक झील (वाटर बॉडी) है जिसमे मछली कीट पतंगे एलगी fungi वनस्पति आदि बहुतायत में उपलब्ध है, जो प्रवासी और स्थानीय पक्षियों (आगे से सिर्फ पक्षियों) के लिये बिल्कुल पर्याप्त है और इसीलिये यहां देशी विदेशी प्रवासी पक्षी प्रवास नेस्टिंग हैचिंग इत्यादि करते हैं।

इसी प्रकार एक और वाटर बॉडी (झील या झाल) मौजूद है जोधपुर झाल में जो मथुरा के फरह तहसील में पड़ता है और कीठम (सूर सरोवर पक्षी विहार से लगभग 8-10 किमी दूर उत्तर पूर्व में। आश्चर्य की बात यह है कि जोधपुर झाल में कई प्रवासी पक्षी ऐसे भी प्रवास करते मिलते हैं जो सूर सरोवर नही आते कभी

जब आपस मे मात्र 10 किमी की दूरी हो और कीठम में भरपूर भोजन, जंगल के साथ पानी भी खूब हो (यहां का वाटर लेवल सिंचाई विभाग द्वारा पूरे वर्ष स्थिर रखा जाता है) तथा एक राष्ट्रीय पक्षी अभ्यारण घोषित हो तो फिर वहां अधिक पक्षी न आकर जोधपुर झाल में पक्षी अधिक क्यों प्रवास करते हैं...?

इसको समझने में थोड़ा समय लगेगा

आपको याद होगा अभी कुछ दिन पहले हमने आगरा कैनाल पर एक स्टोरी की थी वो नहर जो ओखला बैराज से होते हुए आगरा तक आती है और कीठम को पानी सप्लाई करती है। यह नहर ओखला से फरीदाबाद , बल्लभगढ़ पलवल कोसी वृंदावन मथुरा गोवर्धन होते हुए आगरा प्रवेश करती है।

पिछले कुछ वर्षों पहले इसका पानी काफी साफ था, परंतु लगभग दस पंद्रह वर्ष पहले दो नये शहर या टाउनशिप बसाए गये फरीदाबाद और बल्लभगढ़ में (ग्रेटर फरीदाबाद और न्यू बल्लभगढ़) अब हरियाणा की तत्कालीन सरकार ने शहर तो बसा दिये परंतु शहर के सीवर सिस्टम और कूड़े के निस्तारण की कोई व्यवस्था नही की।

इससे नतीजा यह हुआ कि इन दोनों शहरों में एक कूड़ा माफिया तैयार हो गया वो हर घर से एक मुश्त पैसा लेते और घर का कूड़ा तथा सीवर उठा लेते।अब कूड़ा उठ तो जाता पर उसका निस्तारण कहाँ होता वो व्यवस्था तो सरकार ने की ही नही थी

सो सारा कूड़ा और सीवर आगरा कैनाल में डंप होने लगा सारी गंदगी नहर में समाने लगी और नहर का पानी दूषित हो गया। उसका प्रभाव यह हुआ कि कीठम का पानी भी दूषित हो गया जिससे वहां ताजे पानी मे प्रवास करने वाले पक्षी कम होते चले गये।

अब लौटते है जोधपुर झाल पर

जोधपुर झाल भी आगरा कैनाल के टर्मिनल रजवाहा के साथ साथ बसा है, पर वहां नहर का पानी झील नही बनाता, वहां बरसात में जो पानी इकट्ठा होता है उसी से झील बनती है। यह पानी बहुत ही कम प्रदूषित है और पक्षियों के लिये भोजन भी पर्याप्त है।

साथ ही झील किनारे एक दलदल का निर्माण होता है जिससे इंसानी गतिविधि झील किनारे संभव नही आप हम सिर्फ दूर से देख और फोटोग्राफी कर सकते हैं। इसलिये फ्लेमिंगो यहां तो पहुंच गये पर सूर सरोवर नही पहुंचे।

जोधपुर झाल को यदि बरसाती पानी का तालाब बन विकसित किया जाये तो यह एक विश्वस्तरीय वेटलैंड तैयार हो सकता जिसे बर्ड सैंक्चुअरी घोषित किया जा सके, इसके लिये प्रयास जारी हैं। आगरा की कई संस्थाएं इसपर काम कर रही हैं कुछ कानूनी अड़चनें भी है जिन्हें शीघ्र पार पा लिया जायेगा।

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