ग़ाज़ीपुर: वो शहर जहाँ कार्नवालिस सो रहा है
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ग़ाज़ीपुर: वो शहर जहाँ कार्नवालिस सो रहा है

उफनती गंगा और कसरती नौजवानों से आबाद है लहुरी काशी

TNA Contributor

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गाजीपुर || गंगा पर एक पुल है। पुल का नाम है वीर अब्दुल हमीद सेतु। पुल की मरम्मत का काम चल रहा है। सुबह-शाम दर्जनों कसरती नौजवान इस पुल पर पसीना बहाते आपको मिल जायेंगे। ये सब फौज में भरती होने के लिए तैयारी करते हैं। गंगा नदी पर यह पुल उत्तर प्रदेश के पूर्वी सीमांत पर बसे बनारस मंडल के जिले गाजीपुर में बना हुआ है, जिसे लहुरी(छोटी) काशी भी कहते हैं। पूरी दुनिया की तरह यहाँ भी रोजमर्रा की जिंदगी कोविड-19 से प्रभावित हुई है। लेकिन इस समय गंगा के तटीय गाँव और प्रशासन आसन्न बाढ़ को लेकर चौकन्ने हैं क्योंकि गंगा का का जलस्तर चेतावनी बिंदु 61.55 मी. को पार कर चुका है।

प्रदेश के जिलों में गाजीपुर आबादी के हिसाब से बीसवें और क्षेत्रफल के हिसाब से पैंतीसवें नंबर पर आता है। गाजीपुर के नाम के पीछे कई किस्से कहे जाते हैं, जो पौराणिक राजा गाधि से लेकर मुहम्मद बिन तुगलक के एक सैन्य अधिकारी सैय्यद मसूद गाजी तक से जुड़े हुए हैं।

यहाँ प्रचलित कई पौराणिक कहानियों में से एक प्रसिद्ध कहानी सप्त-ऋषियों में से एक ऋषि जमदग्नि की है, कहा जाता है कि उन्होंने गंगा की धारा को मोड़ दिया था। जनपद के जमानियाँ परगना में जमदग्नि आश्रम तथा जमदग्नि पुत्र परशुराम का मंदिर है। लोक-प्रसिद्ध कर्मनाशा नदी यहाँ उत्तर प्रदेश व बिहार के बीच सीमारेखा बनाती है।

गुप्तवंश के प्रतापी सम्राट समुद्रगुप्त के स्तंभलेख (सैदपुर-भीतरी) से लेकर ब्रिटिश कालीन भारत का इस्पाती-ढाँचा कही जाने वाली प्रशासनिक व्यवस्था के संस्थापक गवर्नर जनरल लॉर्ड कार्नवालिस के मकबरे तक भारतीय इतिहास के कई महत्वपूर्ण चिह्न गाजीपुर में मौजूद हैं । बक्सर, चौसा और चुनारगढ़ से नजदीकी के कारण इन क्षेत्रों में हुए इतिहासप्रसिद्ध युद्धों का यहाँ की लोकचेतना पर प्रभाव भी अध्ययन का विषय हो सकता है। ब्रिटिशकालीन अफीम कोठी(फैक्ट्री) के चलते देश के नारकोटिक्स-नक्शे पर गाजीपुर की एक खास जगह रही है।

देश के सैन्य इतिहास में भी गाजीपुर एक विशेष स्थान रखता है। परमवीर चक्र अब्दुल हमीद(1933-65) व महावीर चक्र रामउग्रह पांडेय(1942-71) यहीं के निवासी थे। प्रदेश की बड़ी ग्राम पंचायतों में से एक गहमर सैनिकों के गाँव के रूप में प्रसिद्ध है।

देश की कुछ नामचीन विभूतियों का जन्मस्थान होने का सौभाग्य भी गाजीपुर की धरती को प्राप्त है। जिनमें से एक बड़ा नाम प्रसिद्ध सर्जन व राजनेता रहे डा. मुख्तार अहमद अंसारी(1880-1936) का है, जो जामिया मिल्लिया इस्लामिया के संस्थापक सदस्य थे।

डा. अंसारी मुस्लिम लीग व भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस दोनों दलों के अध्यक्ष भी रहे थे। इनके पौत्र अफजाल अंसारी 2019 लोकसभा चुनावों में गाजीपुर से निर्वाचित हुए हैं। ब्रिटिशकालीन भारत में किसान आंदोलन के एक जुझारू संगठनकर्ता स्वामी सहजानंद (1899-1950) की जन्मभूमि भी यहीं है। इसी क्रम में एक और बड़ा नाम साम्यवादी नेता सरजू पांडेय(1919-89) का है, जो दूसरी लोकसभा से लेकर पाँचवीं तक लगातार निर्वाचित होकर संसद पहुँचे। पूर्व केन्द्रीय मंत्री और हाल में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल बनाए गये मनोज सिन्हा भी गाजीपुर के सांसद रहे हैं।

लेखकों- साहित्यिकारों में ज्ञानपीठ सम्मानित कुबेरनाथ राय(1933-96), विवेकी राय(1924-2016) व बी. आर. चोपड़ा निर्मित 'महाभारत' सहित कई फिल्मों के संवाद-लेखक प्रसिद्ध कथाकार डा. राही मासूम रजा(1927-92) बड़े नाम हैं। लेखक-पत्रकार डा. रामबहादुर राय भी गाजीपुर की मिट्टी में ही जन्मे और पले-बढ़े हैं।

बात यह भी है कि गंगा अभी तक एक निर्मल नदी के रूप में यहाँ बहती है। गंगा और गाजीपुर के रिश्ते के बारे में डा. राही मासूम रजा अपने उपन्यास 'आधा गाँव' की भूमिका में लिखते हैं-" गंगा इस शहर के सिर पर और गालों पर हाथ फेरती रहती है, जैसे कोई माँ अपने बीमार बच्चे को प्यार कर रही हो, परंतु जब इस प्यार की कोई प्रतिक्रिया नहीं होती तो गंगा बिलख-बिलखकर रोने लगती है और यह नगर उसके आँसुओं में डूब जाता है। लोग कहते हैं कि बाढ़ आ गयी..."

जीवित नदियों के किनारे बसे गाँव-कस्बों और शहरों के सामूहिक चेतन-अवचेतन में शायद इस बात का गर्व भी रहता हो, खासकर जब वह नदी गंगा हो। लेकिन देखते ही देखते ये आबाद शहर नदी की निर्मलता और अविरलता को सोख लेते हैं। नदियाँ जब मृतप्राय या फिर मृत हो जाती हैं तो केवल पानी ही नहीं बहुत कुछ सूख जाता है। उम्मीद तो यही की जानी चाहिए कि 'गंदले पानी की यह महान धारा' युगों-युगों तक हमारे इतिहास की कहानियाँ कहती रहेगी। और वीर अब्दुल हमीद सेतु कसरती नौजवानों की हसरतों से आबाद बना रहेगा।

-- शिव प्रताप सिंह/ मैनपुरी

(लेखक आज कल ग़ाज़ीपुर में पोस्टेड हैं। ये उनके निजी विचार हैं)

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