मैनपुरी में स्वास्थ्य विभाग की खुली पोल, फर्श पर लिटाकर किया जा रहा मरीजों का उपचार

मैनपुरी में स्वास्थ्य विभाग की खुली पोल, फर्श पर लिटाकर किया जा रहा मरीजों का उपचार

मैनपुरी, अक्टूबर 9 (TNA) जनपद मैनपुरी में डेंगू वायरल बुखार का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन सुविधाओं और व्यवस्थाओं के लाख दावे कर रहा हो, लेकिन मैनपुरी जनपद के नगला धर्मपाल में जो तस्वीर सामने आई है, वो स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलती नजर आ रही है, साथ ही जमीनी हकीकत को भी बयाँ कर रही है।

वैसे तो इस गांव में हर घर में मरीज है, लेकिन अभी तक करीब दो सौ लोग बुखार से ग्रसित हैं। वहीं पिछले 24 घंटे में एक किशोरी समेत दो मरीजों की बुखार से मौत हो चुकी है। आम दिनों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं मिलना दुश्वार है। वहीं संक्रामक बीमारियों के समय हालत बद से बदतर हो गए है।

एक निजी क्लीनिक पर मरीजों को फर्श पर गद्दे बिछाकर इलाज किया जा रहा है। हालात यह हैं कि यहां के लोग कस्बे में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं। इससे वह एक निजी क्लीनिक पर उपचार ले रहे हैं। क्लीनिक पर मरीज के लिए पलंग नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में मरीजों को जमीन पर टेंट के गद्दे बिछाकर उपचार दिया जा रहा है। जमीन पर लिटाकर ही मरीजों को ड्रिप चढ़ाई जा रही है। नगला धर्मपाल में बुखार तेजी से फैल चुका है।

विजेंद्र सिंह की 17-वर्षीय पुत्री कोमल को पिछले कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। गुरुवार की रात उसकी मौत हो गई। यहां के निवासी सूबेदार शाक्य की 60-वर्षीय पत्नी कमला देवी को भी पिछले कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। परिजन उनका एक निजी डॉक्टर के यहां उपचार करा रहे थे, गुरुवार रात उनकी भी मौत हो गई। नगला धर्मपाल में घर घर बुखार से पीड़ित मरीज देखे जा रहे हैं ।

नगला धर्मपाल में बुखार से पीड़ित 50 से अधिक लोग आगरा, दिल्ली, मेडिकल कॉलेज सैफई और फिरोजाबाद में उपचार ले रहे हैं। यहां के लोगों का कहना है कि अभी तक यहां स्वास्थ्य विभाग की टीम उपचार के लिए नहीं पहुंची। नगर में स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है।

वहीं जिले भर में कोई भी पैथोलॉजी संचालक डेंगू की रिपोर्ट देने को तैयार नहीं है, जिससे बात करो वो ऊपर से मना है रिपोर्ट नहीं दे सकते ये कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते है। और लगभग एक हजार से 15 सौ रुपए लेकर डेंगू की रिपोर्ट दिखाई महीन जा रही बल्कि सिर्फ बताई जा रही है।

— गुलज़ार अहमद

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