अयोध्या में खेला, निर्माण कार्यों में झमेला: गर्भगृह में भरा पानी, सड़कें धंसीं, मुहल्लों में जल भराव

अयोध्या में खेला, निर्माण कार्यों में झमेला: गर्भगृह में भरा पानी, सड़कें धंसीं, मुहल्लों में जल भराव

हल्की बारिश में ही राम मंदिर सहित पूरे शहर में घटिया निर्माण की खुली कलई

लखनऊ, जून 27 (TNA) राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जिस धूम-धड़ाके के साथ श्री राम जन्मभूमि मंदिर समेत पूरे अयोध्या में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू कराए गए, उसकी गुणवत्ता की कलई खुलने लगी है। पहली ही बरसात में जिस तरह से नवनिर्मित श्री राम मंदिर के गर्भगृह की छत टपकने और पानी भरने का खुलासा हुआ है उससे मंदिर निर्माण की गुणवत्ता पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। यही नहीं रामपथ पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे, अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन की बाउंड्री वॉल का धराशायी होना, मोहल्लों में जल भराव भी अयोध्या के विकास और निर्माण कार्यों में लगी एजेंसियों की कारगुजारियों के गवाह बन रहे हैं।

अभी जब प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ है तब अयोध्यावासियों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। तेज बारिश होने पर पैदा होने वाले हालात का अंदाजा ही लगाया जा सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ भले ही अयोध्या के कायाकल्प का सपना देख रहे हों, लेकिन सरकारी मशीनरी और निर्माण एजेसियां उनकी मंशा को पलीता लगाने में कोई कसर बाकी नहीं रख रही हैं। अयोध्या में निर्माण कार्यों में जिस तरह से लापरवाही व भ्रष्टाचार की कलई खुल रही है उससे देश ही नहीं पूरी दुनिया में किरकिरी हो रही है।

अयोध्या के भव्य मंदिर में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अभी छह महीने भी पूरे नहीं हुए हैं और निर्माण कार्यों की हकीकत सामने आने लगी है। यह स्थिति तब है जब अयोध्या में सारे काम डबल इंजन सरकार (केंद्र और राज्य) की निगरानी में हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी अयोध्या की परियोजनाओं की मॉनिटरिंग करते हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय भी नजर रख रहा है।

इन सबके बावजूद पहली बारिश ने करोड़ों हिंदुओं के आस्था के केंद्र अयोध्या में कराए गए मंदिर के निर्माण कार्य की खामियों को उजागर कर दिया। मंदिर की छत से गर्भगृह में पानी टपकने का खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि वहां के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने किया है। हालांकि उनके इस खुलासे के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी और निर्माण समिति से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले पर पर्दा डालने में जुटे हैं।

गर्भगृह में बारिश का पानी टपकने के मामले पर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की सफाई आई है। उनका कहना है कि पानी गिरने की सबसे बड़ी वजह यह है कि प्रथम तल पर बिजली के तार डाले जा रहे हैं। उसके लिए पाइप लगाई गई हैं। कुछ पाइप अभी खुले पड़े हैं, इसी पाइप से होकर बारिश का पानी नीचे तक पहुंचा है। निर्माण कार्य में किसी प्रकार की कमी नहीं है। उनके मुताबिक़ मंदिर नागर शैली में बनाया जा रहा है। इसमें मंडप खुला होगा। बहुत तेज बारिश होने पर इस बात की संभावना है कि बारिश की छींटे आ जाएं।

जानकारों का कहना है कि दरअसल, लोकसभा चुनाव के पहले प्राण प्रतिष्ठा कराने के चक्कर में अयोध्या में जल्दबाजी और आपाधापी में निर्माण कार्य कराए गए जिसमें गुणवत्ता की अनदेखी की गई। बड़ा सवाल यह भी है कि जब देश के दिग्गज वास्तुविद और इंजीनियर मंदिर निर्माण समेत अन्य विकास कार्यों को कराने में लगे थे तो कहां चूक हुई? ट्रस्ट के जिम्मेदार लोग तो दावा यह कर रहे थे कि 1000 वर्ष तक मंदिर जस का तस रहेगा लेकिन पांच महीने में ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया है, जबकि सच्चाई यह है कि प्राण प्रतिष्ठा के लिए अयोध्या को चमकाने और सजाने-संवारने में पानी की तरह पैसा खर्च किया गया है। हालांकि मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से ही जमीन की खरीद-फरोख्त और निर्माण कार्यों में ट्रस्ट के पदाधिकारियों से लेकर सत्तारूढ़ दल से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं की भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हुआ था लेकिन सरकार ने इसे नजरंदाज कर दिया जिसका नतीजा अब सामने आ रहा है।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद शुरुआती दिनों में तो अयोध्या नए रंग-रूप में नजर आ रही थी लेकिन बीते दिनों दो दिन की बारिश ने इसकी चमक को फीका कर दिया है। बड़ी संख्या में लोगों के घर और छोटे मंदिरों को तोड़कर चौड़ा रामपथ और नई सड़कें बनाई गई थीं। ये सड़कें कई स्थानों पर बुरी तरह धंस गई और उनमें गहरे गड्ढे हो गए। उसमें फंसे वाहन इस बात की गवाही दे रहे हैं कि निर्माण एजेंसियों ने बहती गंगा में हाथ धोने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। पुलिस लाइन के पास सड़क धंस गई है। इतना ही नहीं जलवानपुरा से ऐतिहासिक हनुमानगढ़ी भक्तिपथ और टेढ़ी बाजार से लेकर अयोध्या के भीतरी इलाकों में भी सही ढलान और जलनिकासी की व्यवस्था न होने से जल भराव हो रहा है। हल्की सी बारिश में ही लोगों के घरों और दुकानों में पानी भर रहा है। तेज बारिश होने पर हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय निवासी एवं कांग्रेस के नेता गौरव तिवारी का कहना है कि अयोध्या में विकास का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा का मुखौटा उतर गया है। 624 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया राम पथ हल्की सी बारिश को भी नहीं झेल सका। यह सड़क कई जगह धंस गई है। साफ है कि निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार किया गया है। यही नहीं अयोध्या के अन्य इलाकों में भी जो विकास कार्य कराए गए हैं उनकी गुणवत्ता भी बेहद घटिया है। यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर कुठाराघात और अय़ोध्यावासियों के साथ धोखा है। सरकार को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

गर्भगृह में बारिश का पानी टपकने के मामले पर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की सफाई आई है। उनका कहना है कि पानी गिरने की सबसे बड़ी वजह यह है कि प्रथम तल पर बिजली के तार डाले जा रहे हैं। उसके लिए पाइप लगाई गई हैं। कुछ पाइप अभी खुले पड़े हैं, इसी पाइप से होकर बारिश का पानी नीचे तक पहुंचा है। निर्माण कार्य में किसी प्रकार की कमी नहीं है। उनके मुताबिक़ मंदिर नागर शैली में बनाया जा रहा है। इसमें मंडप खुला होगा। बहुत तेज बारिश होने पर इस बात की संभावना है कि बारिश की छींटे आ जाएं। नृपेंद्र मिश्रा का कहना है कि गर्भगृह में पानी नहीं आया। उनके मुताबिक पानी आगे के गुरु मंडप में आया और मंदिर का काम पूरा होने पर ये समस्या दूर हो जाएगी।

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