अलविदा लता त्रिपाठी दी.... यादों के सफर में

अलविदा लता त्रिपाठी दी.... यादों के सफर में

या लिखूं मैं आज, कलम रुक सी गई जाने कहां,

जुबां भटकी यादों के सफर में, रोशनी छिप गयी यहां,

चलूं कैसे बिना उनके, साये बिना, चहकती थीं वे, हंसी मेहरबां,

रहेंगी साथ वे हरदम, जिगर में हसीं आशियां,

नमी बस दे गईं निगाहों में,जहन में बैचेनी यहां,

रूठा है वक़्त दास्तां आखिरी सफ़र का,

खत्म मेरे दरमयां,

कहते नहीं हम खुदा से, ना ही कान्हा से, मुश्किलें न बढ़ा ओ जमीं,

मुश्किलों से कहते हैं आज, बढ़ा दें हौसले, सह सकूं उनकी कमीं,

गुमसुम दौर आया जाने क्यों, तन्हाई का आलम दिखे हर निगाह में,

मन भारी है आज, बोझिल दिल, लता की बिछुड़ी राह में,

दिल है कि मानता नहीं, मनाते ,दिखेंगी हमें, चहकती वो आवाज यों,

ना होंगी पुकार उनकी, अब हर्ष से, ना चाह "चाय" पर चर्चा क्यों?,

नतमस्तक हैं हम सब, सारे प्यारे, उनके सहारे, पराए भी बने अपने,

रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते, दुनिया में, खून से रिश्तों को संजो देते पराए जो अपने,

आशा दीप जला रखते, हैं रोशनी ने मिटा दिए अंधेरे, रहेगें उनके सपने,

दिल की तन्हाई से इबादत,

मीना दीप अग्नि

--प्रदीप अग्निहोत्री/ नयी दिल्ली

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