दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन केंद्र गीता प्रेस पूरा करने जा रहा स्थापना का 100 वर्ष

दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन केंद्र गीता प्रेस पूरा करने जा रहा स्थापना का 100 वर्ष

दुनिया का सर्वाधिक भाषा व संख्या के लिहाज से धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित करने वाला केंद्र है गीता प्रेस। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में स्थापित यह प्रेस चंद माह बाद अपने स्थापना का 100 वर्ष पूरा करने जा रहा है। शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने पर एक वर्ष तक संस्थान द्वारा समारोह आयोजित किए जाएंगे। जिसकी रुप रेखा बनने लगी है।

नो प्राफिट और नो लॉस की संकल्पना के साथ गीता प्रेस की स्थापना गोरखपुर में 1923 में की गई थी। गीता प्रेस का सफर 10 रुपये के किराये के मकान से शुरु हुआ था। आज गीता प्रेस में 15 भाषाओं में करीब 1800 पुस्तकें छपती हैं। गीता प्रेस में आज भी 2 रुपये की धार्मिक किताबें उपलब्ध हैं।

हिंदू धार्मिक ग्रंथों और पुस्तकों को प्रकाशित करने के लिए जया दयाल गोयंदका और घनश्याम दास जालान ने गीता प्रेस की नींव रखी थी। पवित्र गीता और इसकी व्याख्याओं, पवित्र महाकाव्य रामायण, महाभारत, पुराण, उपनिषद, विभिन्न संतों और गुरुओं की रचनाओं को प्रकाशित किया है। इन सभी का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है। कल्याण व कल्पतरू जैसी मासिक पत्रिकाएं भी प्रकाशित की जा रही हैं।

शताब्दी वर्ष महोत्सव की 23 अप्रैल 2022 से होगी शुरुआत

गीता प्रेस अपने स्थापना का 100 वर्ष पूरा होने पर वर्ष भर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। शताब्दी वर्ष में गीताप्रेस से प्रकशित होने वाली पत्रिका कल्याण के विशेषांकों का प्रतिनिध ग्रंथ प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अब तक 95 विशेषांक प्रकाशित हो चुके हैं। सभी के प्रतिनिधि लेखों का एक संग्रह प्रकाशित करने की योजना है। शताब्दी वर्ष को यादगार बनाने के लिए कल्याण के सभी विशेषांकों के मुख्य लेखों को संग्रहित करने का काम शुरू हो गया है। यह ऐसा ग्रंथ होगा जिसमें अब तक प्रकाशित कल्याण के सभी विशेषांकों की झलक दिखाई पड़ेगी।

कल्याण मासिक धार्मिक पत्रिका का 1926 से शुरु हुआ प्रकाशन

कल्याण गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाली मासिक धार्मिक पत्रिका है। इसके प्रकाशन की शुरुआत 1926 में हुई थी। पहला अंक मुंबई से प्रकाशित हुआ था जो साधारण था। इस वर्ष 12 अंक वहीं से प्रकाशित हुए। दूसरे वर्ष 1927 में कल्याण का प्रथम विशेषांक भगवन्नामांक गोरखपुर से प्रकाशित हुआ। तभी से आज तक प्रति वर्ष विशेषांक ही प्रकाशित हो रहे हैं। इस वर्ष गणेश पुराण विशेषांक प्रकाशित हुआ है जो 95वां है।

गीता प्रेस के ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल का कहना है कि शताब्दी वर्ष को यादगार बनाने की कोशिश की जा रही है। कल्याण के सभी विशेषांकों के प्रतिनिधि लेखों का एक संग्रह प्रकाशित करने की योजना बनी है लेकिन इस पर अंतिम मुहर ट्रस्ट बोर्ड की लगनी बाकी है। हमारी तैयारी चल रही है। उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राज्यपाल व मुख्यमंत्री को आमंत्रण भेजा जाएगा। भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा।

जापान से मंगाया गया चार करोड़ का नया प्रिंटिंग प्रेस

मांग के अनुसार लोगों तक धार्मिक पुस्तकें पहुंचाई जा सके, इसके लिए गीता प्रेस प्रबंधन जापान से विशेष कलर प्रिंटिंग मशीन कोमोरी मंगाया है। कोरोना काल में छपाई न होने के कारण गीताप्रेस में 100 से अधिक पुस्तकों का स्टॉक खत्म हो गया था। समस्या के समाधान के लिए गीताप्रेस प्रबंधन जापान से नई मशीन मंगाने का निर्णय लिया।। चार रंगों में छपाई करने वाली इस नई मशीन को लगाने में पांच करोड़ रुपये का खर्च आया है।

इस मशीन से एक घंटे में लगभग 15 हजार बड़े पेज की छपाई हो जाएगी। पुरानी मशीन 13 हजार छोटे पेज छापती है। कोमोरी लिथ्रान जी 37 मशीन 25 इंच लंबे व 37 इंच चौड़े 15 हजार पेपर की छपाई चार रंगों में कर देगी।

यह मशीन 27 फीट लंबी, 12 फीट चौड़ी और सात फीट ऊंची है। इसका औपचारिक उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इस संदर्भ में गीता प्रेस प्रबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल चुका है। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने मशीन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दे दी है।

गीता प्रेस उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि इस मशीन के लगने के बाद काफी हद तक पुस्तकों की किल्लत दूर हो जाएगी। इस मशीन से एक घंटे में लगभग 15 हजार बड़े पेज की छपाई हो जाएगी। इससे पुस्तकों के प्रकाशन कार्य में काफी गति मिलेगी।

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