मोदी की अयोध्या के विकास पर समीक्षा बैठक में हैं संघ-विहिप एवं योगी के लिए कई सन्देश

मोदी की अयोध्या के विकास पर समीक्षा बैठक में हैं संघ-विहिप एवं योगी के लिए कई सन्देश

लखनऊ, जून २६, २०२१ ।। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा अयोध्या के सर्वागीण विकास की शनिवार को की गयी समीक्षा एक साधारण समीक्षा नहीं है। इस समीक्षा के कई सन्देश हैं। सबसे बड़ा सन्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद् के लिए है। मोदी ने समीक्षा करके इन तीनों को एक सन्देश दे दिया कि बिना मोदी के आप सब की योग्यता एवं क्षमता प्रश्न के घेरे में है। वर्षों से चल रहे अयोध्या मंदिर विवाद को बड़े ही सलीके से न्यायालय की परिधि में लेकर उच्चतम न्यायालय से न्याय हुआ।

उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद हिन्दू - मुस्लिम दोनों पक्षकारों ने आम सहमति से मंदिर एवं मस्जिद के निर्धारित स्थानों पर निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है। अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण जिस पर दुनिया की निगाहें लगी हैं। हिन्दुस्तान ही नहीं दुनिया भर में फैले हिन्दुओं की भावनाएँ अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी है इसीलिए निर्माण कार्य के देख-रेख अपने सबसे प्रिय एवं विश्वस्त कैबिनेट सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा को सौंपी।

श्री राम जन्म भूमि तीरथ ट्रस्ट बनाया गया। जिसमें साधु-संतों के अलावा चम्पत राय, राजा अयोध्या विमलेश मिश्रा, अनिल मिश्रा तथा जिलाधिकारी अयोध्या और अपर मुख्य सचिव गृह को सदस्य के रूप में नामित किया गया है। देश भर में राम जन्म भूमि मंदिर जीत का जश्न मनाया गया। चंदे के लिए हिन्दुत्व संगठनों ने दरवाजे दरवाजे दस्तक दी और अरबों रूपये मंदिर निर्माण के लिए चंदे में आ गए।

योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के साथ-साथ एक बड़ा हिन्दुत्व का चेहरा दिखने और बनने के लिए राम मंदिर के निर्माण और अयोध्या के विकास को लेकर लगातार सक्रिय भी हैं। मंदिर का भव्य निर्माण हो उसका विस्तारीकरण हो इसके लिए ट्रस्ट से जुड़े लोगों को ज़मीन खरीद-फरोख्त करने की अनुमति दी गयी। लेकिन इस जमीनों के खरीद में घोटाले दर घोटाले ने ट्रस्ट से जुड़े हुए अधिकृत खरीददार एवं जिलाधिकारी फैजाबाद की योग्यता और क्षमता पर भी सवाल खड़ा कर दिया है।

यह माना जाता है नृपेंद्र मिश्रा की रिपोर्ट ने जमीन खरीद की असलियत को प्रधानमंत्री की जानकारी में ला दिया और मोदी ने हफ़्तों से चल रहे जमीन घोटालों के आरोपों और रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही समीक्षा करने का निर्णय लिया।

आखिर 2 करोड़ की जमीन 10 मिनट बाद ही 18 करोड़ 50 लाख की कैसे हो गयी? नजूल की जमीन जिसका मालिकाना हक़ भी मेयर के भांजे के पास नहीं है उसको 2 करोड़ रूपये देकर खरीदी गयी। ज़मीनों की खरीद में हुए घोटालों के आरोप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही नहीं केंद्र सरकार और हिन्दू संगठन विहिप, आरआरएस की छवि ख़राब हुई है। घोटाला हुआ कि नहीं हुआ और हुआ तो कितने करोड़ का हुआ यह तो सब जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन ट्रस्ट से जुड़े लोगों जिन्होंने ज़मीन की खरीद-फरोख्त की उनके बारे में यह परसेप्शन बन गया कि ज़मीन खरीद में घोटाला किया गया है।

चम्पत राय का व्यवहार और बयान दोनों अहंकार को दर्शाता है और उनका यह कहना कि हम पर महात्मा गाँधी के हत्या के भी आरोप लगे है और ज़मीन घोटाले का भी आरोप लग रहा है। हम आरोपों से नहीं डरते। आरोप लगाने वालों को जो करना है करें और हम अपना कार्य करते रहेंगे। चम्पत राय का यह बयान केवल ट्रस्ट या ज़मीन घोटाले से जोड़ कर नहीं देखा गया बल्कि इस बयान को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी की छवि से भी जोड़ा गया। जिस राम मंदिर निर्माण को लेकर सैकड़ों वर्षों से विवाद चला।

सैकड़ों लोगों ने कुर्बानी दी। जिस मंदिर आंदोलन ने केंद्र एवं प्रदेश में भाजपा को सत्ता में लेकर एक ताकत दी। उस राम मंदिर के निर्माण में अनावश्यक ज़मीन खरीद घोटाला के आरोप को प्रधानमंत्री कार्यालय ने साधारण आरोप के रूप में नहीं बल्कि बहुत गंभीरता से लिया। पूरे प्रकरण की जानकारी प्रधानमंत्री के कैबिनेट सेक्रेटरी रहे नृपेंद्र मिश्रा से ली। यह माना जाता है नृपेंद्र मिश्रा की रिपोर्ट ने जमीन खरीद की असलियत को प्रधानमंत्री की जानकारी में ला दिया और मोदी ने हफ़्तों से चल रहे जमीन घोटालों के आरोपों और रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही समीक्षा करने का निर्णय लिया।

ज़मीन खरीद को लेकर यह परसेप्शन जनमानस में बन गया है कि खरीद में कहीं न कहीं अनियमितता जरूर हुई है। प्रथम दृष्टया देखने में भी यही लगता है कि 2 करोड़ की जमीन 10 मिनट बाद 18 करोड़ 50 लाख की कैसे हो गयी जबकि ज़मीन खरीदने वाले ट्रस्ट में जिलाधिकारी स्वयं भी सदस्य है। ऐसी स्थिति में ज़मीन खरीद को लेकर विवाद और आरोप क्यों खड़े हुए। निश्चित रूप से इस विवाद में उत्तर प्रदेश की सरकार और ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर सवालिया निशान लगाया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समीक्षा करके जनभावनाओं और राम भक्तों का सम्मान किया और यह सन्देश भी दिया कि प्रधानमंत्री मोदी जब तक समीक्षा नहीं करेंगे तब तक राम मंदिर के भव्य बनने का सपना जल्दी पूरा होने वाला नहीं है। समीक्षा का दूसरा पहलु विवाद को समाप्त करना राम भक्तों एवं जनता के परसेप्शन बदलना तथा 2022 चुनाव की भी पृष्ठभूमि के रूप में देखा जाना चाहिए।

कोरोना संकट में स्वास्थ्य सेवाओं की ख़राब स्थिति, आक्सीजन एवं दवा के बिना भारी संख्या में लोगों की जाने गयी है। सरकारी तंत्र पूरी तरह फेल रहा। इन सभी स्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने वैक्सीनेशन को अभियान के रूप में शुरू किया है और हिंदुत्व एजेंडे को धार देने के लिए मंदिर निर्माण की भी समीक्षा की। संघ और विहिप जो योगी आदित्यनाथ को मोदी से बड़ा हिंदुत्व चेहरा बनाने में लगा था उसको भी स्पष्ट संदेश चला गया कि आज भी मोदी से बड़ा हिंदुत्व चेहरा नहीं है।

किसी में भी हिंदुत्व एजेंडे को धार देने और राम मंदिर की तेजी से निर्माण करने की क्षमता नहीं है जैसा कि जनता को अपेक्षा है। जो लोग मोदी और योगी के बीच तुलना कर रहे थे, विवाद पैदा कर रहे थे, उन्हें भी यह सन्देश चला गया कि मोदी का कद, पद और अनुभव तीनों योगी से बहुत भारी है।

(लेखक उत्तर प्रदेश के नामचीन राजनैतिक विश्लेषक हैं और पूर्व में सहारा समय उत्तर प्रदेश के स्टेट हेड रहे हैं, विचार उनके निजी हैं)

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