ब्रह्म मुहूर्त में जगे बिना भक्ति हो ही नहीं सकती!

ब्रह्म मुहूर्त में जगे बिना भक्ति हो ही नहीं सकती!

सूर्योदय से पहले का समय जिसे अमृतवेला या ब्रह्म मुहूर्त भी कहते हैं। सभी प्राचीन ग्रंथों में ब्रह्म मुहूर्त की बड़ी महिमा बखान की गई है।

ब्रह्म मुहूर्त में हमारे सभी विचार सोए हुए होते हैं, उस समय जो भी मुख्य विचार जागृत होता है वह रानी मक्खी की तरह होता है, उसी के पीछे सारे विचार चलते हैं, जैसे रानी मक्खी के पीछे सारी मक्खियां चलना शुरू हो जाती हैं। परमात्मा के उसी सात्विक विचार के प्रभाव के तले हमारे सारे विचार होते हैं, जिस से वे पवित्रता की ओर जाते रहते हैं। इस से हमसे दिनभर पवित्र कर्म ही होते रहते हैं।

क्योंकि जैसे विचार होते हैं, वैसे ही कर्म होते हैं।

सूरज उगने के बाद भी जो सोए रहते हैं उनका तेज खत्म हो जाता है।

उद्यन्त् सूर्यं इव सुप्तानां द्विषतां वर्च आददे। -अथर्ववेद- 7/16/२

ब्रह्ममुहूर्त की निद्रा पुण्य का नाश करने वाली होती है।

“ब्रह्ममुहूर्ते या निद्रा सा पुण्यक्षयकारिणी।"

ब्रह्म मुहूर्त में जगने से व्यक्ति को सुंदरता, लक्ष्मी, बुद्धि, स्वास्थ्य, आयु आदि की प्राप्ति होती है। ऐसा करने से शरीर कमल की तरह सुंदर हो जाता है।

"वर्णं कीर्तिं मतिं लक्ष्मीं स्वास्थ्यमायुश्च विदन्ति।

ब्राह्मे मुहूर्ते संजाग्रच्छि वा पंकज यथा॥"

अंग्रेज़ी में भी कहा गया है Early to bed and early to rise.

makes a man healthy wealthy and wise.

मगर early to rise तभी संभव होगा, जब early to bed होगा। क्योंकि जब तक जल्दी सोएंगे नहीं, नींद पूरी होगी नहीं। और नींद पूरी होगी नहीं, तो जलदी उठ नहीं पाएंगे।

ब्रह्म महूर्त में हमें परमात्मा का नाम, कथा,भजन आदि श्रवण करना चाहिए।

ब्रह्म महूर्त में की गई भक्ति, उपासना का प्रभाव कई हज़ार गुना अधिक होता है।

रात्री 9 से 11 -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जु में होती है। इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है ।

यदि इस समय भोजन किया जाय तो वह सुबह तक जठर में पड़ा रहता है, पचता नहीं और उसके सड़ने से हानिकारक द्रव्य पैदा होते हैं जो अम्ल (एसिड) के साथ आँतों में जाने से रोग उत्पन्न करते हैं। इसलिए इस समय भोजन करना खतरनाक है।

शाम 5 से 7 -- इस समय जीवनी-शक्ति विशेष रूप से गुर्दे में होती है । इस समय भोजन कर लेना चाहिए । शाम को सूर्यास्त से 40 मिनट पहले भोजन कर लेना उत्तम रहेगा। सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक (संध्याकाल) भोजन न करे।

-- मनीष मेहरोत्रा/बाराबंकी

(जानकारी साझा करने वाले गूढ़ रहस्यों व जानकारियों से भरपूर धार्मिक पुस्तकें लिखने के लिए जाने जाते हैं। इस लेख में प्रस्तुत की गयी जानकरियाँ उनके निजी जानकारियों पर आधारित हैं)

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