नीब करोली महाराज की अनंत कथाएँ : कम्बल रूपी इंजेक्शन
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नीब करोली महाराज की अनंत कथाएँ : कम्बल रूपी इंजेक्शन

पड़ोसी की मदद से किसी तरह एक डाक्टर मिला । इन्हें ख़तरे में बताकर अस्पताल ले जाने की सलाह दी

Mohit Dubey
TNA Contributor

Mohit Dubey

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१९९२ में अगस्त माह में सिक्का जी अपनी पत्नी तथा सास के साथ पदमपुरी के दर्शन करने जा रहे थे । रास्ते में उनके सीने में बहुत ज़ोर का दर्द उठा । पत्नी ने वापस घर चलने की सलाह दी पर सिक्का जी बोले, "घर से चले है तो पदमपुरी के दर्शन कर के ही लौटेंगे"। परन्तु धीरे धीरे दर्द बड़ता गया और साँस लेने में भी परेशानी होने लगी, किसी तरह वे घर वापिस पहुँचे। उन्होंने श्री माँ-महाराज का स्मरण किया और पलंग पर लेटते ही वे अचेत हो गये ।

१५ अगस्त था उस दिन कोई डाक्टर भी नहीं मिल रहा था । तब तक सिक्का जी की नब्ज़ भी लापता होने लगी थी - शरीर शीतल हो चला था - पसीना बह रहा था । पड़ोसी की मदद से किसी तरह एक डाक्टर मिला । इन्हें ख़तरे में बताकर अस्पताल ले जाने की सलाह दी । तभी एकाएक श्रीमती सिक्का को महाराज जी के उस कम्बल की याद आई जिसको उन्हें आशीर्वाद स्वरूप देते समय श्री माँ ने कहा था ," जब कोई गहरी दुःख- पीड़ा हो तो ये कम्बल ओढ़ा देना बीमार को"। याद आते ही उन्होंने वे कम्बल सिक्का जी के ऊपर डाल दिया ।

पड़ोसी की गाड़ी में सिक्का जी को अस्पताल ले जाया गया । डाक्टर इंजेक्शन लेने अंदर गया । परन्तु तब तक तो विश्वास रूपी कम्बल का इंजेक्शन लग चुका था। डाक्टर इंजेक्शन लेने अंदर गया और सिक्का जी का दर्द ग़ायब और वे पूरे होश में थे । शीघ्र ही स्वास्थ्य लाभ भी हो गया । सिक्का जी अपने वर्तमान शरीर को अब बाबा महाराज द्वारा प्रदत्त शरीर ही मानते है - पुनर्जन्म का ।

जय गुरूदेव

अन्नत कथामृत

-- पूजा वोहरा/ नयी दिल्ली

The News Agency
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