नीब करोली महाराज की अनंत गाथाएँ : महासमाधी के दो महीने बाद भक्त को इलाहाबाद में रिक्शे पर दर्शन देना

नीब करोली महाराज की अनंत गाथाएँ : महासमाधी के दो महीने बाद भक्त को इलाहाबाद में रिक्शे पर दर्शन देना

मेरे ( लेखक ) एक मित्र है- बिजौन चटर्जी । मैं उनको बाबा जी के पास लेकर आया क्यूँकि वे बहूत बड़े पारिवारिक संकटमोचन थे । बाबा के अमोघ आशीर्वाद से उसकी मामूली आमदनी में भी उसकी तीन बहनों का विवाह देखते देखते हो गया बिना दहेज के अच्छे अच्छे घरों मे । बंगाली ब्राह्मण के लिये ये एक चमत्कारी कृपा थी बाबा जी की । उसकी अपनी भी दो कन्याएँ थी, उनका भी विवाह अच्छे घरों में हो गया । वे तो बाबा का मुरीद हो गया ।

दिसम्बर १९७३ के तीसरे सप्ताह मे, एक दिन बिजौन मुझे मिला और बोला, "जोशी जी कल मुझे महाराजजी के दर्शन हुए।" मैंने उत्सुक होकर पूछा, " कहाँ, कैसे ?" वे बोला मैं साइकिल से ऑफ़िस जा रहा था, चर्च लेन पर डायमंड दूबले होस्टल के सामने बाबा जी रिक्शे पर बैठ कर आनंद भवन की तरफ़ जा रहे थे । मुझे ऑफ़िस को देर हो रही थी और बाबा जी का रिक्शा भी आगे बढ़ता जा रहा था, तब मैंने वही से झुक कर प्रणाम कर दिया । उन्होंने भी मुस्कुराते हुए मेरा प्रणाम स्वीकार कर लिया ।

मैं अचंभित हो उसका मुँह ताकता रहा कि ये क्या कह रहा है, मैंने पूछा बिजौन तुमने ठीक पहचाना क्या वे बाबा ही थे । वे बोला," कया मैं बाबा को भूल सकता हूँ । "तब मैंने कहाँ, " बिजौन तुम बहुत भाग्यशाली हो । महाराज जी ने तो १० सितम्बर को ही महासमाधी ले ली थी । " ये सुनकर वे हक्का बक्का रह गया । कुछ देर बोला , हाँ जोशी जी मैं सच में भाग्यवान हूँ ।"

उक्त लीला कर महाराजजी ने बता दिया कि वे कहीं भी नहीं गये है । यही है ।ऐसे महासमाधी के बाद भक्तों को बाबा ने कई बार दर्शन दिये और बता दिया कि मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ ।

(मुकून्दा)

जय गुरूदेव

अनंत कथामृत

--पूजा वोहरा/नयी दिल्ली

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