नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: महाराज जी के सीने में साक्षात् शंकर भगवान के दर्शन!

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: महाराज जी के सीने में साक्षात् शंकर भगवान के दर्शन!

शंकर भगवान के अनन्य भक्त, मेरे पिता जी नित्य ही रुद्राभिषेक अत्यन्त निष्ठा से एकाग्र हो करते थे और भेड़ाघाट (जबलपुर) से प्राप्त एक अनुपम स्फटिक सदृश बड़े आकार के नरमदेश्वर का श्रृंगार नित्य रोरी, लाल चन्दन तथा फूलों से करते थे। साथ में उसी भाव से विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ भी।

पर वे मेरे बड़े भाई, पूरनदा के कारण महाराज जी से अत्यन्त क्षुब्ध थे कि अभाव में डूबे पूरनदा गृहस्थी की जिम्मेदारियाँ त्याग उनके पीछे निरर्थक डोलते हैं बिना किसी (सांसारिक) प्राप्ति के ।

परन्तु एक दिन हल्द्वानी फॉरेस्ट क्वाटर्स में जब सामूहिक पूजन हो रहा था शंकर जी का तो महाराज जी के एकाएक वहाँ आगमन पर उन्हें देखकर पिताजी को अकस्मात हल्का-सा उन्माद हो उठा। उन्होंने काँपते हुए महाराज जी को प्रणाम किया तो महाराज जी ने उनसे पूछा, “तूने हेड़ियाखान के बाबा देखे हैं?” पिताजी ने कहा, “नहीं, महाराज। मैं तो सोमवारी महाराज को मानता हूँ।”

बाबा जी ने फिर पूछ दिया, “नहीं देखे तूने हेड़ियाखान बाबा? वे शिव थे।” और अबकी पिताजी के नहीं कहने पर महाराज जी ने अपने सीने से दोनों हाथों से कम्बल हटा दिया। पिताजी ने महाराज जी के सीने में साक्षात् शंकर भगवान के दर्शन किये !! उन्होंने काँपते हुए बाबाजी को पुनः प्रणाम किया !! (लेखक)

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