नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ:तुम रक्षक काहू को डरना...

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ:तुम रक्षक काहू को डरना...

बजरंगगढ़ (नैनीताल) में महाराज जी अपने भक्तों के साथ बैठे थे मनोरा के जंगल में । एकाएक घास में आग लग गई जो फैलती-बढ़ती चली गई । महाराज जी अपने विनोद में जोर जोर से कहने लगे, “जंगल में आग लग गई है । अब पूरन की नौकरी गई ।” (पूरनदा तब जंगलात विभाग में कार्यरत थे ।)

परन्तु भक्त पर इस बात का कोई प्रभाव न पड़ा (यद्यपि पहाड़ी जंगलों में लगी ऐसी आग फैलती जाती है कई दिनों तक।) वे जानते थे कि महाराज जी है तो कोई क्या बिगाड़ लेगा । (तुम रक्षक काहू को डरना ।) अस्तु, उन्होंने भी महाराज जी का मन में स्मरण कर एक पत्थर उठाया और आग की तरफ फेंक कर कहा, "आग ! बुझ जा ।” और कुछ ही क्षणों में आग स्वतः ठंडी पड़ गई !!

क्या पूरन दा के पत्थर फेंकने पर बुझी वह आग ?

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