नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएं: अब पिथौरागढ़ में बना हनुमान मंदिर

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएं: अब पिथौरागढ़ में बना हनुमान मंदिर

इसी बीच महाराज जी के उत्तराखण्ड के विभिन्न स्थानों में भ्रमण के मध्य उनके आदेशानुसार पिथौरागढ़ (उ० प्र० ) में भी भक्तों के द्वारा एक रमणीक टीले पर हनुमान जी की भव्य मूर्ति के साथ एक मंदिर भी बना दिया गया जिसके निर्माण एवं प्रतिष्ठापन में (स्व०) हीरालाल साह (हब्बा जी) एवं उनके पुत्र श्री बसन्त लाल साह जी का अथक सहयोग रहा ।

महाराज जी की प्रेरणा से, उनकी निर्वाण-प्राप्ति के बाद भी भक्तों ने, जिसमें तत्कालीन परगनाधिकारी श्री महेश्वर लाल की प्रमुख भूमिका रही, इन्डो-टिबेटन बार्डर के पास धारचूला एवं उससे भी आगे, मानसरोवर जाने के मार्ग पर स्थित अन्तिम भारतीय चौकी, जिप्ती में भी हनुमान जी को स्थापित कर हमारे देश की उत्तरी सीमा को एहिमिस सुरक्षा सम्बल दे दिया ।

धारचूला मंदिर नेपाल को अलग करती काली नदी के इस पार स्थित है। भारत की ओर के भी तथा नेपाल की ओर के भी इलाके अत्यन्त पिछड़े एवं गरीब तथा एक प्रकार से भक्ति-भाव विहीन रहे थे पर हनुमान जी के वहाँ विराज जाने के बाद न केवल भारतीय वरन उस पार की नेपाली जनता भी भक्ति-मार्गी बन उठी। साथ में दोनों ही देशों की (धारचूला एवं दरचुला की) जनता में आपसी प्रेम एवं समृद्धि का प्रवेश हो गया !!

जिप्ती में जहाँ एक मुसलमान सैनिक द्वारा मंदिर की नींव डाली गई वहीं एक ईसाई सैनिक ने मंदिर का निर्माण किया !! सबही धर्मनि के । अनुयाई, तुम्हें मनावें शीश झुकाई वाले बाबा जी का ही एक और कौतुक था यह भी । उतनी खड़ी चढ़ाई में उतनी ऊँची जिप्ती चोटी तक हनुमान जी सैनिकों के कन्धों पर सवार होकर पहुंच ही गये ।

इसी प्रकार गर्जिला क्षेत्र के कोटमन्या नामक एक गाँव में भी भत्तों द्वारा हनुमान मंदिर महाप्रभु की प्रेरणा से स्थापित हो गया (जिसके निर्माण में एक अध्यापक, श्री सुरेश चन्द्र जोशी की प्रमुख भूमिका रही ।)

मंदिर में जब प्लास्टरिंग हो चुकी थी ३/४ भाग से भी अधिक तो घटायें घिर आई, तथा बूँदें पड़नी प्रारम्भ हो गई । स्पष्ट था कि कच्चा प्लास्टर बह जाता और गरीब जनता द्वारा चन्दा कर यह निर्माण कार्य नष्ट हो जाता । तब सभी ने हताश होकर महाराज जी से रक्षा हेतु प्रार्थना की और तभी उस क्षेत्र में वर्षा बन्द हो गई जब कि आस पास खूब मेह बरसता रहा !!

(कथा अनंतामृत के सम्पादित अंश)

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