नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जब सपने में महाराज जी ने दिया एक मंत्र

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जब सपने में महाराज जी ने दिया एक मंत्र

वर्ष १९६० में मेरे पति देव (श्री राज कुमार) कार्य वश दौरे पर थे । रात्रि को मैंने स्वप्न देखा कि हम एक ऊँचे पर्वत पर चढ़ते जा रहे हैं और भय से काँप रहे हैं कि अब गिरे, तब गिरे । तभी शेषनाग जी आ पहुँचे और उन्होंने अपने सारे फन फैला दिये । हमें और भी भय हो गया । पर उन्होंने, एक ओर तो हमें प्रणाम किया, और दूसरी ओर आशीर्वाद भी दिया कि बिना भय के ऊपर चढ़ते जाओ।

तब हम आश्वस्त होकर ऊपर चढ़ने लगे और शीघ्र ही शिखर पर पहुँच गये। वहाँ पहुँच कर देखा कि ऊपर की ओर एक ही कमरे वाला मकान है जिसके भीतर झाँकने पर बाबा जी महाराज एक कुर्सी पर बैठे दिखाई दिये !! उन्होंने हमें भीतर आने को कहा। जब हम भीतर पहुँचे, उन्हें प्रणाम किया तो आदेश मिला कि, “वहाँ कागज-कलम रखा है, उठा लाओ।”

कागज-कलम मिलने पर उन्होंने स्वयं उस कागज में एक मंत्र लिखा और हमसे कहा, “पढ़कर सुनाओ।” मंत्र पढ़ते पढ़ते मेरी नींद खुल गई, परन्तु मुझे मंत्र पूरी तरह से स्पष्ट रूप से याद रहा और में उसका नित्य प्रति जाप करती हूँ। मेरा विश्वास है कि यह मंत्र बाबा जी ने मेरे पति की हर प्रकार की रक्षा हेतु दिया है। मुझे मंत्र-प्राप्ति की प्रबल इच्छा भी थी, पर किससे लूँ – यही समस्या बनी रही सदा । महाराज जी ने मेरी यह इच्छा भी पूरी कर दी।

-- नीलिमा राजकुमार

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