नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: चिलम के कश के बाद कुम्हार के सिर पर हाथ रखा और वो दुनिया से विरक्त हो गया

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: चिलम के कश के बाद कुम्हार के सिर पर हाथ रखा और वो दुनिया से विरक्त हो गया

एक दिन बाबा शहर के बाहर धूल भरी सड़क पर चल रहे थे, उन्होंने देखा कि एक युवा कुम्हार चिलम पी रहा था । बाबा ने उससे जोर से पूछा, "तुम कौन हो?" कुम्हार ने उत्तर दिया, "तुम कौन हो? बाबा ने फिर प्रश्न बदल दिया और पूछा, "तुम किस जाति के हो?" कुम्हार ने फिर से प्रश्न दोहराया। बाबा ने तुरंत उत्तर दिया, "मैं एक सफाई कर्मचारी हूँ, तुम कौन हो?" इस बार कुम्हार गर्व से बोला और कहा, "मैं कुम्हार हूं।"

बाबा ने उनके प्रति सम्मान दिखाया और विनम्रतापूर्वक पूछा, "क्या आप मुझे धूम्रपान करने के लिए अपना चिलम देंगे?" कुम्हार ने मिट्टी का पाइप बाबा की ओर तान दिया। बाबा ने उसे दो-तीन बार इस्तेमाल किया और फिर अपना हाथ कुम्हार के सिर पर रख दिया। युवा कुम्हार उसी क्षण दुनिया से विरक्त हो गया। बाबा के निर्देश पर उसने स्नान किया और बाबा ने उनके लिए गेरुवे वस्त्र मंगवाए। बालक को माला देकर बाबा ने उसे दीक्षा दी और साधु बना दिया। फिर उन्होंने, उसके रहने की व्यवस्था की और लड़के को वहाँ से बद्रीनाथ जाने का निर्देश दिया।

~ द डिवाइन रीयालिटी

One day Baba went walking along a dusty road outside the town, he saw a young potter who passed Baba puffing a pipe. Baba asked him loudly, "Who are you?" The potter replied, "Who are you? Baba then changed the question and asked, "What caste are you?" The potter repeated the question back to him. Baba at once replied, "I am a sweeper, who are you?" This time the potter spoke with pride and said, "I am a potter."

Baba showed respect towards him and humbly asked, "Will you give me your chillum to smoke?" The potter held out the clay pipe towards Baba. Baba puffed it two or three times and then placed his hand on the potter's head. The young potter became quite detached from the world in that instant.

On Baba's instruction he took a bath and Baba got the clothes of a monk for him. Giving the boy a rosary, Baba initiated him and made him a monk. He then made arrangements for his boarding and lodging and instructed the boy to go to Badrinath from there and then left.~ The Divine Reality

— Contibuted by Ravindra Singh/Jodhpur

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