नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: समाधि के बाद इलाहाबाद में बंगाली भक्त को रिक्शे पे बैठे दर्शन दिए

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: समाधि के बाद इलाहाबाद में बंगाली भक्त को रिक्शे पे बैठे दर्शन दिए

मेरा एक मित्र है। नाम बिजौन चटर्जी । बाबा जी महाराज के पास मैं ले आया था उसे एक महान आर्थिक एवं पारिवारिक संकट से मुक्ति दिलवाने । महाराज जी के परम, अमोघ आशीर्वाद के फलस्वरूप, उसी की मामूली आमदनी पर निर्भर उसकी तीन बहिनों का विवाह देखते देखते २-३ वर्ष के भीतर हो गया। बिना विशेष दहेज दिये अच्छे "अच्छे घरों में !! (बंगाली ब्राह्मण के लिये यह एक चमत्कारपूर्ण कृपा थी बाबा जी की ।) और फिर कुछ ही वर्षों में उसी प्रकार दो अपनी कन्यायें भी सम्पन्न घरों में वैवाहिक बन्धन में बंध गईं !! बाबा जी के पास बिजौन अक्सर पहुँच जाता था ।

दिसम्बर 1973 के तीसरे सप्ताह मैं बाबा जी महाराज के विरह में अपनी छुट्टियाँ वृन्दावन, कैंची आदि जगहों में बिता इलाहाबाद लौट आया था। तभी एक दिन बिजौन मुझे एलनगंज चौराहे पर मिल गया। बड़ी उत्फुल्लता से उसने मुझसे कहा, “जोशी जी, कल मुझे महाराज जी के दर्शन हुए।” मैंने उत्सुक होकर पूछा, “कहाँ, कैसे ?” वह बोला, “मैं साइकिल से आफिस जा रहा था। चर्च लेन के आगे डाइमंड जुबली होस्टल के फाटक के पास बाबा जी रिक्शे में बैठकर आनन्दभवन की तरफ जा रहे थे। मुझे आफिस को देर हो चुकी थी और बाबा जी का रिक्शा भी आगे बढ़ने लगा था। तब मैंने उन्हें साइकिल पर से ही झुककर प्रणाम कर दिया। उन्होंने भी सिर झुकाकर मुस्कुराते मेरा प्रणाम स्वीकार कर लिया।"

मैं अचम्भित होकर कुछ क्षण उसका मुँह ताकता रहा। फिर शंकित हो पूछा, “बिजौन, तुमने ठीक से पहिचाना कि वे महाराज जी ही थे ?” तब वह अपनी स्वाभाविक हँसी के साथ बोला, “अरे जोशी जी ! अब आप पूछेंगे - बिजौन, तुमने मुझे ठीक से पहिचाना ? क्या मैं बाबा जी को भूल सकता हूँ ?" उसके चेहरे पर आश्वस्त विश्वास का भाव पढ़कर मैंने कहा, “बिजौन तुम बहुत भाग्यवान हो । महाराज जी ने तो १० सितम्बर को ही महासमाधि ले ली थी ।” मेरी बात सुनकर वह कुछ देर मुँह बाये हक्का-बक्का खड़ा रहा । फिर एक लम्बा उच्छ्वास लेकर बोला, “हाँ, जोशी जी ! मैं सचमुच बहुत भाग्यवान हूँ ।”

उक्त लीला कर महाराज जी ने मुझे भी बता दिया कि वे कहीं नहीं गये हैं, यहीं हैं । (मुकुन्दा) इसी प्रकार इलाहाबाद में भी और लखनऊ में भी बाबा जी ने अपनी महासमाधि के बाद भी श्रीमती एवं श्री विजय चन्द्र चौधरी को भी अपने ही स्वरूप में (स-शरीर) दर्शन दे दिये थे ।

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