नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: ५७ साल के भक्त को सेब दे कहा जा तेरे लड़का होगा!

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: ५७ साल के भक्त को सेब दे कहा जा तेरे लड़का होगा!

मनोहर लाल साह जगाती इलाहाबाद में एक प्रसिद्ध केटरर हुआ करते थे । धन-दौलत भी बहुत थी पास में । विशेष बात उनमें यह थी कि केवल जरूरतमन्द की ही नहीं, वरन किसी की भी वे हर तरह मदद करते थे । छोटा-मोटा भण्डारा तो उनके घर नित्य ही होता रहता विशेषकर माघ माह में और जुलाई में कालेज-युनिवर्सिटी खुलने पर भी, जब उत्तराखण्ड एवं अन्य जिलों के साधनहीन विद्यार्थी प्रवेश हेतु आते । बाबा जी इन्हीं गुणों के कारण उन पर प्रसन्न थे, यद्यपि जगाती जी स्वयं उनके प्रति पूर्णतः समर्पित न थे ।

परन्तु वे निःसन्तान थे । अपने भाई गोपाल के बच्चों को लेकर ही संतुष्ट थे । एक दिन बाबा जी ने उन्हें एक फल दे दिया यह कह कर कि “इसे अपनी पत्नी को खिला देना । लड़का हो जायेगा ।” तब जगाती जी ५८ वर्ष के करीब उम्र प्राप्त कर चुके थे और पत्नी भी ५० वर्ष की हो चुकी थीं । फल तो ले लिया उन्होंने, पर सोचा, “अब संतान लेकर क्या करूँगा इस ढलती उम्र में | गोपाल के बच्चे हैं हीं मुझे संतोष देने को।”

और फिर पास बैठे अपने मित्र की तरफ इशारा कर कहा, "इसके भी संतान नहीं है और ये बहुत चाहते हैं बच्चा । इन्हें दे देता हूँ यह सेव।” बाबा जी ने कहा, “तू चाहता है तो दे दे ।” और उन्होंने वह फल अपने उस और भी अधिक उम्र वाले निःसंतान मित्र को दे दिया । (शायद विश्वास की भी कमी ही होगी उनमें ।) परन्तु वह तो महाराज जी का अमोघ आशीष था !! साल भर के भीतर उस वृद्ध दम्पति को पुत्र प्राप्त हो गया !! किन्तु सवा-डेढ वर्ष की आयु पाने के बाद वह पुत्र जाता रहा। अब तो वह मित्र और भी दुखी हो गया कि इससे तो अच्छे निःसंतान थे ।

बाबा जी के पुनः आने पर जगाती जी ने उनसे शिकायत की कि, “वाह, महाराज ! ऐसा फल दिया कि मेरा मित्र और भी दुखी हो गया।” तब बाबा जी ने केवल इतना कहा, "वह फल तो तेरे लिये था, तेरे मित्र के लिये नहीं । तूने अपने मन से उसे दे दिया । तब उसके पास कैसे रहता ? हम क्या करें इसमें ?”

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