नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: एक किशोर से हुक्का माँगना, फिर उसको एक माला दे कान में कुछ फुसफुसाना

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: एक किशोर से हुक्का माँगना, फिर उसको एक माला दे कान में कुछ फुसफुसाना

काशीपुर (नैनीताल) में अपनी लीलायें कर महाराज एक अत्यंत धूल-धूसरित मार्ग पर चल पड़े । तभी सामने से कुम्हारों की एक टोली गधों पर घड़े लादे चली आई। उनमें से एक किशोर-वय के कुम्हार को महाराज जी ने रोक कर पूछा, “तू कहाँ से आ रहा है ?” शायद अपना इस तरह से रोके जाना और यह प्रश्न उसे रुचा नहीं ।

वह प्रतिवाद में बोला, “तू कहाँ से आ रहा है !” महाराज जी पुनः बोले, “कौन जात है?” उसने भी बाबा जी से पूछ लिया, “तू कौन जात है ।” बाबा जी बोले, “भंगी ।” और फिर उसके हाथ में उठाये हुक्के को देख बोले, “हुक्का पिलायेगा ?” किशोर कुम्हार बाबा जी की वय और वेषभूषा देख पहले कुछ झिझका, फिर उसने हुक्का बढ़ा दिया महाराज की तरफ । महाराज जी ने उसके सिर पर हाथ रख दिया और आगे बढ़ गये ।

कुछ ही क्षणों में वह किशोर अपनी टोली छोड हमारे पीछे लग लिया और हमारी टोली का अंग बन गया !! तब बाबा जी ने एक बाग के मध्य एक कुएँ के किनारे उस कुम्हार किशोर को अपने कम्बल से एक माला निकाल कर दे दी और कहा, “जपना” और कान में भी कुछ कहा। वह माला लेकर चला गया । हम लोग भी हल्द्वानी को चल दिये । सारी लीला एक रहस्य बन कर रह गई । न मालूम किस जन्म का परिकर था वह बाबा जी का जिसे उस धूल-धूसरित राह में बाबा जी ने ढूँढ निकाला और उसे पुनः साधना-क्षेत्र में प्रविष्ट करा दिया । (पूरनदा)

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