नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: धीरे धीरे हनुमानगढ़ी ने अपना वर्तमान रूप ले लिया

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: धीरे धीरे हनुमानगढ़ी ने अपना वर्तमान रूप ले लिया

इस तरह हनुमान जी (अभी अपने लघु रूप में) बजरंग गढ़ में विराज गये । अब वहाँ नित्य सुबह-शाम पूजा, आरती और प्रार्थना होने लगी । हनुमान जी को तरह तरह के भोग अर्पण होने लगे । बाबा जी के वहाँ पुनः आगमन पर जब उन्हें उक्त घटना सुनाई गई तो वे इस घटना में निहित रहस्य को छिपाते केवल इतना बोले, "तुम लोगों ने पहचाना नहीं । वे दो सिद्ध थे जो हनुमान जी को प्रणाम करने आये थे ।"

कालान्तर में यहाँ महाराज जी की विभिन्न प्रकार की लीलाओं के साथ हनुमानगढ़ी ने अपना वर्तमान रूप ले लिया । साथ में श्री सीता-राम, लक्ष्मण जी का रघुनाथ मंदिर और एक शंकर जी का मंदिर भी बन गया। धीरे-धीरे अन्य भवन भी बनते रहे। यहाँ महाराज जी की प्रेरणा से भक्तों द्वारा वर्षों तक अखण्ड नाम-कीर्तन श्री राम जय राम जय जय राम चलता रहा। (और अब हर पर्व को तथा मंगलवार/गुरुवार को सामूहिक सुन्दरकाण्ड का पाठ होता है ।)

इस सारी क्रिया में केवल लीला-नायक बाबा जी महाराज की अपनी मनसा-शक्ति का ही चमत्कार दृष्टिगोचर होता रहा यंत्रवत सब कुछ करते रहे बाजीगर के जमूरों की तरह । स्थानीय लोगों के मन में तो यही शंका बनी रही थी कि बजरी के इस कच्चे पहाड़ अन्य सभी पर मंदिर रुक भी सकेगा कि नहीं (एक छोटे विग्रह की स्थापना में तो उक्त दशा हुई थी ) और यदि बन भी गया तो ठहर भी पायेगा कि नहीं ? और कि यह मंदिर, यह स्थान जनसाधारण द्वारा मान्यता प्राप्त कर पायेगा भी कि नहीं ?

परन्तु महाराज जी की मनसा-शक्ति के समक्ष प्रकृति भी क्या कर सकती थी? एक की जगह तीन तीन मंदिर तथा कई अन्य भवन बन गये जो आज भी (वर्ष १६६३ में) ३६-४० वर्ष से यथावत अपनी जगह खड़े हैं । यही नहीं, मंदिर बनने के तुरन्त बाद ही बजरी युक्त पगडंडी की जगह मंदिर के द्वार तक पहुँचने के लिए बजरी के पहाड़ की परिक्रमा-सी करती पक्की मोटर रोड भी बन गई जिस पर भारी वाहन भी चलते हैं !!

आज तो इस मंदिर की भक्तों एवं जनसाधारण की मनोकामना पूर्ति हेतु प्रख्यात रूप से मान्यता हो चली है, तथा यह नैनीताल जिले का एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी बन चुका है ।

-- (अनंत कथामृत से साभार)

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