नीब करोली बाबा की अनंत कथाएँ : दादा मुखर्जी का सोम्बारी महाराज को ना पहचान पाना

नीब करोली बाबा की अनंत कथाएँ : दादा मुखर्जी का सोम्बारी महाराज को ना पहचान पाना

एक बार कैंची आश्रम में एक व्यक्ति देर रात आकर लालटेन माँगने लगा । दादा ने उन्हें लालटेन दे दी क्योंकि उनकी कार ख़राब हो गयी थी ।थोड़ी ही देर में वे आदमी लालटेन लौटा गया ।

अगले दिन महाराज जी ने पूछा," तुमने उन्हें मन्दिर में आकर भोजन करने को नहीं कहा ? " उन्होंने ऐसा नहीं किया था । महाराज दादा को डाँटने लगे ,"तुम बेवक़ूफ़ हो । तुम्हें पता नहीं वे कौन थे ?" वे सोम्बारी महाराज थे ।" और दादा बाबा के चेहरे को देखते रहे ।

देव भूमि में सन्तों का वास है । न जाने किस रूप में विचरण करते हुए आ जाये बाबा के सिवा कौन जान सकता है ।

जय गुरूदेव

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