नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जब एक जिन्न से परेशान लखनऊ के एक मुस्लिम को अपना कम्बल देकर उसकी परेशानी दूर की

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जब एक जिन्न से परेशान लखनऊ के एक मुस्लिम को अपना कम्बल देकर उसकी परेशानी दूर की

लखनऊ के एक मुसलमान भक्त के बरेली में रहने वाले सम्बन्धी ने एक फकीर से धन प्राप्ति हेतु याचना कर डाली । फकीर ने भी मौज में आकर उसे अरबी-फारसी में एक मन्त्र बता दिया और कहा कि चालीस दिन इसे जपना और तब एक आकृति प्रगट होगी जो तुम्हारा मनोरथ पूरा कर देगी ।

पर इन चालीस दिनों के जप के मध्य उस व्यक्ति का मन पलट गया, और जब आकृति सचमुच प्रगट हो गई तो उसने ईश्वर दर्शन की याचना कर डाली । इस पर वह निम्न स्तर की आकृति (जिन्न) रुष्ट हो गई और उसे तरह तरह से सताने लगी ।

उसका खाना, पीना, सोना, चैन से कार्य करना सब हराम हो गया यहाँ तक कि सोते सोते उसकी खाट भी पलट जाती । वह व्यक्ति दिन पर दिन सूखता चला गया । वह फकीर भी, जिसने वह मंत्र दिया था, उसके लिये कुछ न कर सका । टोने, टोटके आदि भी सब बेकार हो गये उस जिन्न के आगे । उलटे वह जिन्न और भी अधिक उग्र हो उठा ।

तब किसी ने उसे बाबा नीम करौली जी के पास जाकर फरियाद करने को कहा । मरता क्या न करता । वह मुसलमान याचक इस हिन्दू बाबा को खोजता खोजता आ ही गया उनके पास और अपना दुखड़ा गाकर रोने लगा बुरी तरह, और बाबा जी से मुक्ति की प्रार्थना करने लगा। बाबा जी भला अपने को कैसे प्रगट होने देते सबके समक्ष ?

सो बोले, "तुमसे झूठ कह दिया किसी ने । हम कुछ नहीं जानते हाँ, यह कम्बल जो हमको एक साधू ने दिया है, तुम ओढ़े रहो। शायद तुम्हारी तकलीफ दूर हो जाये।" और ऐसा कह अपना कम्बल उतार कर उसे दे दिया

बस क्या था । कम्बल ओढ़ते ही जिन्न गायब !! और उसको ऐसी शान्ति मिल गई मानो मीलों जेठ की दुपहरी में तपती बालू के ऊपर नंगे पाँव चलने के बाद पीपल की नम छांव हासिल हो गई हो ।

पर बाद में जब उस व्यक्ति को पता चला कि यह कम्बल तो बाबा जी महाराज का ही था तो वह तन-मन से उनका मुरीद हो गया, आर जब-तब आकर उनके चरणों में वह कम्बल रखकर बैटरी चार्ज (अपने भाव में कम्बल की शक्ति को पुनः जागरूक कर) लेता !! (स्मृति सुधा से)

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