नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जब एक रात परछाई ने महाराज जी का रूप ले लिया

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जब एक रात परछाई ने महाराज जी का रूप ले लिया

शिमला में एक बर्फीली रात, रानी गिरिजा देवी बहुत परेशान थीं, क्योंकि उनके पति राजा भाद्री को बुखार था। उस रात उन्हें एक सपना आया जिसमें उन्होंने एक परछाई को खिड़की से घर में प्रवेश करते देखा। उस परछाई ने महाराज जी का रूप ले लिया । बाबा उनको एक मंत्र देना चाहते थे, और वह कह रही थी कि अगर उसे सपने में दीक्षा दी गई तो वह भूल जाएगी कि वह क्या था।

तब बाबा ने उन्हें जगाया और मंत्र बताया। उन्होंने फिर से इसे याद करने में असमर्थता व्यक्त की क्योंकि उन्हें नींद आ रही थी। तीसरी बार बाबा ने उन्हें बिस्तर पर बिठाया और एक कलम और कागज देकर उन्हें मंत्र लिखने के लिए कहा। रानी गिरिजा देवी ने उसे लिख लिया और फिर सो गयीं । अगली सुबह जब वह उठीं तो उन्होंने अपनी लिखावट में लिखा हुआ मंत्र देखा। इस घटना के बाद से वह मन्त्र का जाप करने लगीं।

~द डिवाइन रियलिटी

One snowy night in Shimla, Rani Girija Devi was very perturbed, for her husband, Raja Bhadri, was down with a fever. She had a vision that night in which she saw a shadow entering the house through a window. It changed itself into the form of Maharaj.

Baba wanted to give a mantra, and she was saying that she would forget what it was if she was initiated in a dream. Then Baba woke her up and told her the mantra. She again expressed her inability to remember it because she felt sleepy. The third time Baba made her sit on the bed and giving her a pen and paper asked her to write down the mantra.

She wrote it down and then went back to sleep. When she woke up the next morning, she saw the pen, paper, and the mantra written down in her own handwriting. Still she chants that mantra.

~The Divine Reality

(Contributed by Ravindra Singh)

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