नीब करोली बाबा की अनंत कथाएँ : साँप और बिच्छु की लड़ाई

नीब करोली बाबा की अनंत कथाएँ : साँप और बिच्छु की लड़ाई

बाबा अपने भक्तों के साथ गंगोत्री से ऋषिकेश की और चल पड़े । रात को आठ बजे वे धराली नामक स्थान पर पहुँचे और वही आपने वास किया ।धराली मे सब गृहस्थ भक्त धर्मशाला मे रूके । उमा दत्त शुक्ला ने वही चाय की दुकान मे रात बिता दी । बाबा वही चाय की दुकान के पीछे एक लकड़ी के गोदाम मे लेट गये ।

जब सवेरे गिरीश उठकर सबसे पहले लकड़ी के गोदाम मे बाबा के दर्शनों को गये तो उन्होंने बाबा की छाती के उपर कम्बल पर एक साँप और बिच्छु को लड़ते देखा । वे भयभीत होकर चिल्ला उठे । उनके इस प्रकार चीख़ने से बाबा ने ज्यों ही कंबल उठाया तो दोनों एक और चल गये । बाबा की विविध प्रकार की लीलाएँ चलती रहती थी । वे सब कुछ कर के नादान बन जाते और अपने ईश्वरीय तत्व को छिपाते रहते ।

जय गुरूदेव

अलौकिक यथार्थ

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