नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: भक्तों की अकाल मृत्यु से रक्षा करना!

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: भक्तों की अकाल मृत्यु से रक्षा करना!

रामपुर के एक भक्त पुलिस इन्सपेक्टर की पुत्री टाइफाइड के बिगड़ जाने से मरणासन्न हो गई । उन दिनों टाइफाइड जैसी बीमारी में खाना बिल्कुल बन्द कर दिया जाता था जिसके कारण लड़की और भी अधिक कमजोर हो मरणासन्न हो चली थी । रामपुर से महाराज जी के लिए नैनीताल को पत्र आया कि लड़की अपनी मृत्यु से पूर्व उनके दर्शन करना चाहती है। (परन्तु इस पत्र के पहुँचने के पूर्व ही महाराज जी ने कह दिया था कि उन्हें रामपुर जाना है !!)

रामपुर उस लड़की के घर पहुँचने पर सीधे उसके कमरे में पहुँचते ही बाबा जी चिल्लाकर बोले, “मेरी लड़की को भूखा मार दिया। मैं भी भूखा हूँ। मेरे लिये खाना बनाओ ।” और प्रसाद बनने पर स्वयँ पाते हुए उन्होंने अपनी थाली से लड़की को एक चपाती देते हुए कहा, “ले, बिस्तर से उठ और चपाती खा” लड़की किसी तरह बिस्तर से उठी और बैठकर उसने चपाती का कुछ हिस्सा खाया ।

फिर महाराज जी ने उससे कहा, "तू उठ, कुर्सी में । मैं थक गया हूँ । बिस्तर में मैं लेटूंगा ।” भक्त लड़की किसी तरह उठी और कुर्सी में बैठ गई और बाबा जी उसके बिस्तर में एक घंटा लेटे रहे। फिर उठकर चले गये ।

लड़की इतने-से उपचार के बाद ही कुछ ही दिनों में पूर्ण रूपेण स्वस्थ हो गई !! (बाबा जी उसकी चारपाई में लेटकर उसकी समस्त व्याधि जो समेट कर चल दिये थे !!)

(परन्तु क्या ये भी केवल अकाल मृत्यु से रक्षा-लीलायें हैं ? )

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