नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: गुफा का पुनःदर्शन

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: गुफा का पुनःदर्शन

जैसा पूर्व में निवेदन किया जा चुका है कि बाबा जी खेत की जिस गुफा में प्रारम्भ में रहते थे, उसे उन्होंने कुछ काल बाद छोड़ दिया था (और मंदिर के पास एक नई गुफा एवं कच्ची कुटी बनवाकर रहने लगे थे ।) इस प्रारम्भिक गुफा के ऊपर धीरे धीरे मिट्टी जमा होने लगी थी तथा कालान्तर में यह भी साथ के खेत में सम्मिलित हो चुकी थी जिसके ऊपर हल भी चले और खेती भी हुई । इस गुफा की चर्चा गाँव के पुराने । भक्त श्री सिद्धी माँ को विस्तार से सुना चुके थे ।

और तभी से श्री माँ इस गुफा के दर्शन हेतु अत्यन्त उत्सुक हो चली थीं, तथा वर्ष १६७७-७८ से उन्होंने इस गुफा के वास्तविक स्थान के बारे में जिज्ञासा प्रगट करनी प्रारम्भ कर दी थी। कुछ पुराने लोगों से भी पूछा गया, परन्तु लगभग आधी सदी से भी ऊपर के अन्तराल के बीच गाँव के खेतों, सड़कों, खेत की मेड़ों और भवनों की स्थितियाँ बहुत बदल चुकी थीं। कोई गुफा का एक स्थान बताता तो कोई दूसरा। कुछ वर्षों तक यही सिलसिला बना रहा और गुफा का सही स्थान निश्चित न हो पाया। परन्तु माँ ने न तो धैर्य खोया और न गुफा को ढूँढ निकालने की लगन को ही त्यागा। (वे तो इस हेतु उपयुक्त समय एवं वातावरण की प्रतीक्षा में थीं !!)

अन्त में वर्ष १६८८ में श्री माँ मंदिर के सामने के खेत में घूमते हुए एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रह गईं !! तभी वहाँ उपस्थित एक वृद्ध ने कह दिया, "जहाँ माँ खड़ी हैं, वहीं पर खोदो ।" (क्या माँ-महाराज ने ही प्रेरित किया उसे ऐसा कहने को ?) और जब दिनेश दीक्षित ने गाँव वालों की सहायता से वहीं १०-१२ फीट की गहराई तक खोदा तो बाबा जी महाराज की उस गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे !! तब अत्यन्त सावधानी के साथ धीरे-धीरे खोद कर ऊपर की मिट्टी हटाकर पूरी गुफा को प्रगट कर लिया गया !!

लगभग १२-१३ फीट लम्बी और ८६ फीट चौड़ी तीन खण्डों में बँटी इस गुफा की बची हुई २-२, ३-३ फीट ऊँची मिट्टी की दीवारों तथा मेहराबों पर महाराज जी के उस गुफा काल (सम्भवतः १६१७-१६१८) की पुती कलई (चूना) अब भी शेष थी !! कुछ मिट्टी के बर्तनों के अवशेष तथा दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला-लकड़ी भी प्रारम्भ में मिले । गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी-गणेश की मूर्तियाँ भी मिली (जिन्हें, संभवतः, गाँव वालों ने ही बाबा जी के गुफा प्रवेश-महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रतिस्थापित किया होगा हवन-पूजन के साथ )

गुफा के प्रगट होते ही उसमें से शाकल्य एवं धूप की सुगन्ध निकलकर व्याप गई चहूँ ओर !! गुफा दर्शन की इस अद्भुत लीला से सभी आनन्द एवं हर्षोल्लास में मगन हो उठे। बाबा नीम करौरी महाराज की जय” के नारों से वायुमण्डल गूंज उठा । गुफा दर्शन हेतु सैकड़ों की संख्या में जनता टूट पड़ी । उपलक्ष में कई दिन तक दर्शनों, कीर्तन भजनों, भंडारों की, प्रसाद की धूम मचा रही । धूम-धाम से गुफा का आरती-पूजन हुआ ।

श्री माँ द्वारा इस गुफा का इस प्रकार प्रगट करवाकर बाबा जी ने ६०-७० वर्ष पूर्व की गई अपनी लीलाओं को, जो केवल कथायें बनकर रह गई थीं, नई पीढ़ी के समक्ष पूर्ण रूपेण प्रमाणित कर रख दिया ॥ और जनता में बाबा जी महाराज के प्रति निष्ठा-आस्था की मात्रा कई गुना बढ़कर व्याप गई। साथ में बाबा जी द्वारा प्रतिस्थापित नीब करौरी के हनुमान मंदिर के प्रति भी जनता में अपार श्रद्धा-भक्ति विकसित हो उठी । इस प्रकार इस गुफा को प्रगट करने में निहित श्री माँ का उद्देश्य पूरा हो गया ।

क्रमशः कल...

(अंश कथा अनंतमृत से साभार)

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