नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: अब जा। काम पर नहीं जायेगा ?

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: अब जा। काम पर नहीं जायेगा ?

आर. पी . पाण्डे को आफ़िस पहुँचने में देर हो चुकी थी । सोचा, "अब आधे दिन की छुट्टी लेनी पड़ेगी । तब तक दादा के घर बाबा के दर्शन क्यूँ न कर लूँ। सो बाबा जी के श्री चरणों में जा पहुँचे ।और बाबा जी ने उन्हे अपने चरणों में ऐसे बिठा लिया कि आधे दिन की छुट्टी का प्रश्न भी शेष हो गया। पाण्डे जी सोचते रह गये कि अब तो पूरे दिन की छुट्टी लेनी पड़ेगी ।तब बाबा जी बोले : “अब जा। काम पर नहीं जायेगा ?”

सुनकर आप पुरे दिन की छुट्टी की अर्ज़ी लगाने आफ़िस पहुँचे, तो वहाँ हाज़िर बाबू आश्चर्य से बोल उठे,"पाण्डे जी आप तो सुबह से यही है, तब ये छुट्टी की अर्ज़ी कैसी ?" पाण्डे जी द्वारा शंका करने पर उसने हाज़िरि राजीस्ट्र पर उनके हस्ताक्षर भी दिखा दिये । हैरान से हूये पाण्डे जी जब अपनी सीट पर पहूँचे तो आस पास के अन्य कर्मचारियों ने भी उनके यहाँ उपस्थित होने की पृष्टि कर दी और कहने लगे कि आप तो सुबह से ही यहाँ बैठे काम कर रहे है ।

बाबा जी की इस दया का गुणगान करने के अलावा पाण्डे जी और क्या कर सकते थे ।( पर ये स्पष्ट हो गया कि बाबा जी पाण्डे जी का रूप धर कर वहाँ ये लीला कर रहे थे ।)

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