नीब करोली बाबा की अनंत कथाएँ : भक्त के दुःख से विचलित

नीब करोली बाबा की अनंत कथाएँ : भक्त के दुःख से विचलित

इलाहाबाद में बाबा मेरे घर विराजे हुए थे, बाबा एकाएक गंभीर हो गये और मुझसे बार बार पूछते रहे, "अर्ध रात्रि गई कपि नहिं आवा --- क्या अर्थ हुआ इसका?" और उतनी ही बार मेरे द्वारा अर्थ बताने पर सिसक सिसक कर रोते रहे --- कभी स्वच्छंद रूप से, कभी कम्बल में मुँह छिपाकर।

फिर उठकर दादा के घर चले गये ! वहाँ भी वह, वही प्रश्न करते रहे और सिसकते रहे और फिर मुझे वहाँ से चले जाने को कह दिया। और स्वंय को एक कमरे में बन्द कर लिया। न जाने किस भक्ति की व्याधि वहाँ अपने पर लेकर क्षय करते रहे ! कोई भक्त अवश्य परेशान था, जिसके लिये परेशान थे बाबा और उसकी तकलीफ अपने पर ले ली थी।

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