नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: महाराज जी द्वारा प्राण रक्षा हुई

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: महाराज जी द्वारा प्राण रक्षा हुई

घटना सन् 1990 की है। मंगलवार का दिन था। उस दिन रक्षाबन्धन भी था। उन दिनों श्री दादा मुखर्जी के यहाँ चर्चलेन स्थित लाल मकान पर प्रति मंगलवार सायं सात बजे तक कीर्तन भजन होता था। प्रायः हम लोग प्रति मंगलवार को कीर्तन में जाते थे। उस दिन किसी विशेष कारण से हम लोग जल्दी नहीं जा सके। करीब नौ बजे रात में वकील साहब ने कहा अच्छा तुम लोग तैयार हो लो।

सिविल लाइन्स में स्थित श्री हनुमान जी के दर्शन करने चलेंगे, उन दिनों यहाँ हिन्दू मुसलमान का कुछ दंगा चल रहा था। अतः शहर के कई भागों में कर्फ्यू लगा हुआ था। संयोग की बात थी, जिस समय हम लोग घर से निकले घनघोर बारिश शुरू हो गयी थी। फिर भी हम लोग मन्दिर के लिए निकल पड़े। दर्शन कर श्री मुखर्जी दादा के यहाँ जा रहे थे कि संगीत समिति के पास बारिश इतनी तेज हो गयी कि कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था। पानी काटने के लिए वाइपर चल रहा था।

गाड़ी में मेरे दोनों बच्चे (एक बेटा एक बेटी) और हम दोनों थे। बड़े धमाके के साथ हमारी गाड़ी नाले के किनारे स्थित एक बिजली के खंभे से जा टकराई और बन्द होकर खड़ी हो गयी। हम कुछ समझ ही न पाये कि क्या हुआ? हम लोग घबरा गये थे किसी को कहीं खरोंच तक नहीं आयी। अगर जरा भी गाड़ी आगे बढ़ जाती तो न जाने क्या से क्या हो जाता? सिपाहियों का गस्त चल रहा था।

तीन-चार सिपाहियों ने हमें आ घेरा। तभी इनके साथी एडवोकेट श्री रामनाथ भल्ला जी कहीं से अपनी गाड़ी लिए उधर से निकले। उन्होंने हमारी स्थिति देखी, उन्हें समझने में देर न लगी। उन्होंने सिपाहियों से बात की, फिर उन्हीं की मदद से हमारी गाड़ी अपने घर में ढकेलकर लगवायी, जो पास में था। वह स्वयं अपनी गाड़ी से हम लोगों को हमारे घर पहुँचा आये। इस प्रकार उस दिन श्री बाबा जी ने हम चारों की प्राण रक्षा की।

॥ राम ॥

-शान्ति शिवहरे/इलाहाबाद

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