नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: काली कमली वाले बाबा स्वयं भगवान थे

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: काली कमली वाले बाबा स्वयं भगवान थे

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मैं महाराज जी के साथ बैठा उनकी विभिन्न लीला-क्रीड़ाओं का आनन्द ले रहा था। तभी उनके एक भक्त श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ यात्रा से लौटकर उनके दर्शनों को आ गये। उन्होंने बड़ी श्रद्धा से अपनी यात्रा के अनुभव सुनाये जिनके मध्य उन्होंने बाबा जी से सु-विख्यात काली कमली वाले बाबा द्वारा यात्रियों की सुख सुविधा हेतु मार्ग में स्थान-स्थान पर उनके द्वारा आवास एवं भोजन-प्रसाद की व्यवस्था की भी भूरि भूरि प्रशंसा की ।

(तब केवल जोशी मठ तक ही यातायात व्यवस्था थी बाकी मार्ग पैदल तय करना पड़ता था।) महाराज जी ध्यान से सब सुनते रहे और अन्त में बोले, “तुम जानते नहीं । काली कमली वाले बाबा स्वयँ भगवान थे। काला कम्बल ओढ़े प्रगट हुए और अपने दर्शनार्थी भक्तों के लिये ही ऐसा प्रबन्ध करते रहे ।”

अपनी इस वाणी को उन्होंने कई बार दुहराया, और उतनी ही बार स्वयं अपने कम्बल की ओर भी दृष्टि करते रहे तथा उसे इधर-उधर भी करते रहे। सँभालने की मुद्रा का भ्रम दिलाते (जो एक अप्रत्याशित क्रिया थी बाबा जी की ।) तब तो उनके ऐसा करने का प्रयोजन जरा भी समझ में नहीं आया न उनके अपने भी कम्बल की ओर बार बार निहारने में निहित इशारे का ही । परन्तु अब काली कमली के साथ उनका अपने भी कम्बल का सम्बन्ध पूरी तरह स्पष्ट हो गया है ।

-- देवकामता दीक्षित

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