नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: हम मौसम बदल देंगे, बहुत ठंड पड़ेगी!!!

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: हम मौसम बदल देंगे, बहुत ठंड पड़ेगी!!!

वर्ष १९७३ में श्री होतृदत्त शर्मा (अहलादपुर, अलीगढ़) की कन्या का विवाह था । जेठ की गर्मी थी धधकती । शर्मा जी को चिन्ता थी कि इस तपते मौसम में वर पक्ष के लोगों की खातिर खुशामद ठीक से हो भी पायेगी कि नहीं। गाँव में बिजली की समस्या और भी जटिल थी। होतृदत्त जी महाराज जी के अनन्य भक्तों में हैं ।

१५ जून के भण्डारे में वे इस विवाह के पूर्व कैंची में महाराज जी के दर्शनों को आये तो महाराज जी ने स्वयँ इस चर्चा को छेड़ते हुये आश्वासन दिया कि, “हम मौसम बदल देंगे। ओढ़ने-बिछाने का ठीक प्रबन्ध कर लेना । बहुत ठंड पड़ेगी ।" इस गर्मी में ऐसा आश्वासन केवल मानसिक चिन्ता के हरण-सदृश ही प्रतीत हुआ (यद्यपि शर्मा जी को महाराज जी पर भरोसा भी रहता रहा है सब परिस्थितियों से निबट जाने की क्षमता का ।)

पर यह सब तो बाबा जी का कल्याणकारी नाटक था । जब शर्मा जी गाँव पहुँचे तो उसी के तुरन्त बाद उनके भावी समधी कन्या को देखने आ गये और पुष्पा का विवाह तय कर चले गये !!

और बारात के पहुँचने के पूर्व से ही पुरवाई के साथ कुछ वर्षा भी हो गई । रात को इतनी ठंड बढ़ गई मानों अगहन-पूस की रात हो !! परन्तु बारात बिदा होने के बाद पुनः वही जेठ की तपन !! (प्रसंगवश इस कन्या के विवाह के पूर्व होतृदत्त जी वृन्दावन आश्रम में थे । एक दिन बाबा जी इन पर एकाएक रुष्ट (!) हो बोले, “पंडत, तुम्हारा मन नहीं लग रहा है । तुम जाओ अपने गाँव । (वृन्दावनेश्वरी मंदिर की ईंट-सरिया-सीमेन्ट का) हिसाब मुकुन्दा को दे दो ।”

पंडित जी ने लाख कहा कि ऐसी बात नहीं है । पर बाबा जी नहीं माने । मैं तब आगरा से आया था आश्रम । आखिर शर्मा जी उदास हो मुझे चार्ज देकर गाँव चले गये । मैं भी क्या करता ? दो दिन बाद मैं भी आगरा आडिट ड्यूटी में चला गया । पर यह सब तो बाबा जी का कल्याणकारी नाटक था । जब शर्मा जी गाँव पहुँचे तो उसी के तुरन्त बाद उनके भावी समधी कन्या को देखने आ गये और पुष्पा का विवाह तय कर चले गये !! जब मैं पुनः आश्रम पहुँचा तो पाया कि शर्मा जी वहाँ हाजिर हैं – अति प्रसन्न। उन्होंने ही मुझे बाबा जी की यह लीला सुनाई। (मुकुन्दा।)

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