नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: मैं बाबा नीम करौली हूँ, तुम मुझे क्यों परेशान करते हो ?

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: मैं बाबा नीम करौली हूँ, तुम मुझे क्यों परेशान करते हो ?

बाबाजी का जीवन रहस्यमय रहा । जितने लोग उतनी बातें । उनके साथ बिताये लोगों के संस्मरण इतनी है कि पूरा एक महाकाव्य भी छोटा पड़ जाय । इन्हीं संस्मरणों में एक भक्त ने बताया कि एक बार मंगलवार के दिन मैंने सोचा कि बाबा के दर्शन करने कैंची हो आऊँ । लेकिन अचानक ही मुझे अपने व्यापार के हेतु आवश्यक कार्य से नैनीताल जाना पड़ गया ।

मन बहुत खराब हुआ क्योंकि महाराजजी के दर्शनों की बहुत लालसा थी । सोचा कोशिश पूरी करूँगा दर्शनों की । नैनीताल कार्य समाप्त कर के मैंने सोचा आख़िर की कैंची जाने वाली बस मुझे मिल जायेगी । लेकिन वो भी निकल गयी । किसी तरह मैं भुवाली पहुँचा पर वहाँ से कोई भी साधन न मिल पाया कैंची जाने को । मैं बहुत उदास मन से घर लौट आया ।

मैं घर आकर भी यही सोच रहा था कि अचानक से घर का किवाड़ ज़ोर से खटका । बाहर कुछ शोर की आवाज़ आ रही थी । " मैं बाबा नीम करौली हूँ " रात के नौ बज गये थे । और महाराजजी मुझे आवाज़ लगा रहे थे । दरवाज़ा खोला तो बाबा बोल उठे,” तुम मुझे हमेशा परेशान कर देते हो , तुम मुझे क्यों परेशान करते हो ? फिर महाराज जी ने भोजन पाया और फिर जिस भक्त के साथ आये थे वापस जीप से कैंची लौट गये । भक्त की सच्ची आस्था के आगे प्रभु को झुकना पड़ा । क्योंकि उसके मन और दिमाग़ में जो चल रहा था बाबा को सब पता था।

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