नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: मैनपुरी के भक्त परिवार के दामाद का जल संकट समाप्त कर नया जीवन दिया!

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: मैनपुरी के भक्त परिवार के दामाद का जल संकट समाप्त कर नया जीवन दिया!

मैनपुरी के वकील श्री राम रतन वर्मा महाराज जी के परम भक्तों में से थे । उनकी पुत्री शान्ती जब विवाह योग्य हुई तो महाराज जी ने स्वयँ (वर्मा जी को बताकर और उन पर जोर डालकर) शान्ती जी का विवाह वीरेन्द्र वर्मा जी से करवा दिया। शान्ती जी मंगली थीं और मंगली लडके से ही उनका विवाह होना था शास्त्रोक्त विधा के अनुसार । परन्तु वीरेन्द्र वर्मा स्वयँ मंगली न थे !!

होतव्यता ऐसी कि उनके घर वालों ने न तो शान्ती जी की जन्मपत्री माँगी और न वीरेन्द्र जी की ही भेजी, वरना शायद वह विवाह ही दोनों पक्ष न करते। बाद में जन्मपत्री मिलाने पर ज्ञात हुआ कि इन कठिन ग्रहों की स्थिति के कारण विवाह के चौथे वर्ष वीरेन्द्र जी का जीवन-सूर्य जल में डूब जाने के कारण अस्त हो जाने की प्रबल संभावना है !!

अस्तु, वीरेन्द्र जी को किसी जलाशय अथवा नदी में स्नान नहीं करने दिया जाता था। परन्तु भय तो भय, वह भी मृत्यु का। किसी भी घटना अथवा दुर्घटना के कारण, जिसमें जल की ही मुख्य भूमिका होती. ऐसा हो सकता था । अतः दोनों पक्षधारी सदा चिन्तित रहते थे परन्तु यह विवाह भी तो महाराज जी ने ही तय किया था !! क्या त्रिकालदर्शी बाबा जी इन सब बातों से अनभिज्ञ थे ऐसा करते समय ?

कुछ काल बाद बाबा जी आये और वीरेन्द्र जी तथा उनके बुआ के लड़के आदि को लेकर नदी में स्नान हेतु उठा ले गये । पहले तो वीरेन्द्र जी किनारे ही खड़े रहे । बाद में बाबा जी का आश्वासन पाकर किनारे ही थोड़े से जल में स्नान करने लगे । तभी बाबा जी ने पीछे से आकर इन्हें धक्का दे दिया गहरे जल में ! ये तैरना तो जानते न थे - बह चले । सभी हा-हाकार कर उठे ।

तब बाबा जी स्वयँ कूद पड़े नदी में और काफी दूर जाकर खूब पानी पिये मृत-प्राय वीरेन्द्र जी को नदी से बाहर खींच लाये तथा उनके पेट से पानी निकाल कर उन्हें पुनः सचेत कर स्वस्थ कर दिया । पुनः उन्हें माँ-बाप तथा पत्नी शान्ती के पास लाकर बोले, "लो. इसका जल-संकट समाप्त हो गया हमेशा के लिये । अब इसे कुछ न होगा ।

वीरेन्द्र जी आज सपरिवार मैनपुरी में रिटायर्ड जीवन सर्वसुख भोगते व्यतीत कर रहे हैं । (१६६२)

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