नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: झाँसी की गरीब बुढ़िया के तीन दिन से मृत बेटे को यूँ जीवित कर उठाया जैसा सोया हुआ हो!

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: झाँसी की गरीब बुढ़िया के तीन दिन से मृत बेटे को यूँ जीवित कर उठाया जैसा सोया हुआ हो!

झाँसी के पास एक गाँव में एक गरीब वृद्धा के घर बाबा जी अक्सर पहुँच जाते थे। जाति की अहीरिन उस वृद्धा के घर की प्रेम की रोटी बाबा जी अवश्य पा लेते थे। उसका एक ही लड़का था- (पति नहीं था)-उसी की कमाई से माँ-बेटा पेट भरते थे वह लड़का भी एक दिन काल-कवलित हो गया।

परन्तु उस गरीब वृद्धा के बेटे का शव उठाने वाला भी कोई न मिला -सभी कतरा गये कि उन्हें दाह-क्रिया का खर्च न उठाना पड़ जाये कहीं। तीन दिन हो चुके थे, शव ऑगन में ही पड़ा रह गया (परन्तु महान आश्चर्य कि उसमें बाबा जी के प्रताप से कुछ भी खराबी न आ पाई !!) बुढ़िया हताश हो आँसू बहाती रही। उसने बाबा जी को याद भी किया कि नहीं, ज्ञात नहीं।

परन्तु करुणाकर बाबा पहुँच गये उसके पास और आते ही बोले,"माई, हमारी रोटी ला?" तब बुढ़िया सिसक कर बोली, "कहाँ से लाऊँ रोटी ? रोटी कमाने वाला तो वो पड़ा है आँगन में मरा हुआ।” बाबा जी तत्काल बोल उठे, "मरा कहाँ है ?" और लड़के के शव के पास जाकर बोले, “उठ ! उठता क्यों नहीं है ? पड़ा क्यों है ?" और लड़का बाबा जी की अमृत वाणी कानों में पड़ते ही उठ बैठा !!

(हरिराम जोशी जी द्वारा केहर सिंह जी को सुनाई गाथा ।)

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