नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जा, हनुमान जी के दर्शन कर आ!

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: जा, हनुमान जी के दर्शन कर आ!

बाबा जी में हनुमान-दर्शन का एक संस्मरण श्री गोपाल नारायण मेहरोत्रा जी द्वारा मुझे कैंचीधाम में प्राप्त हुआ । मैं महाराज जी के (विग्रह) दर्शनों के लिए कैंचीधाम जा रहा था। मेरे डब्बे में भारतीय नौ सेना विराट जलपोत के एक बड़े अफसर बैठे हुए थे जो नैनीताल अपने मित्र श्री देवीलाल साह जी से मिलने जा रहे थे। बातों बातों में बाबा जी की बात चल पड़ी तो बोले मैं तो भाई नास्तिक था अव्वल दर्जे का परन्तु मेरी पत्नी देवीलाल जी के परिवार से मित्रता होने के कारण बाबा जी की भक्त हो चली थीं ।

उस दिन (वर्षों पूर्व) हम अल्मोड़ा जा रहे थे। मार्ग में कैंची में १५ जून के सिलसिले में भीड़ देखकर पत्नी ने आग्रह किया बाबा जी के दर्शन हेतु । हम मंदिर के भीतर आ गये। पत्नी तो बाबा जी के पास चली गई पर मैं दूर ही खड़ा रहा । कुछ देर बाद बाबा जी मुझे पास बुलाकर बोले, “तू तो नास्तिक है।” “हाँ, जी ।” “हम तुझे आस्तिक बना दें ?” “बना दीजिए ।”

“अच्छा जा, हनुमान जी के दर्शन कर आ ।” मैं चला गया । पर जब हनुमान जी के दर्शन करने लगा तो देखा कि बाबा जी हैं उस स्थान पर !! अपनी आँखें मलीं और फिर देखा तो पुनः बाबा जी ही दिखे !! आश्चर्य से मैं यह सब कुछ देखता रह गया।

और फिर जब उनके पास लौट कर आया तो बोले, “तेरे दिमाग में एक प्रश्न है ।” “हाँ महाराज ।” “तू पास हो जायेगा, जा ।” दरअसल मैंने (तब) नेवी में नौ सैनिक अफसर की प्रोन्नत-परीक्षा दे रखी थी । पर मेरा एक परचा बिल्कुल बिगड़ गया था। पास होने का कोई प्रश्न ही न था। मैंने कहा, “मेरा तो एक परचा बिल्कुल बिगड़ गया है । मेरे पास होने का कोई सवाल ही नहीं है ।" पर वे बोल उठे, “नहीं, उसी में तेरे सबसे ज्यादा नम्बर आयेंगे ।” और जब रिजल्ट के बाद मार्कशीट भी मिली तो उसी परचे में मैंने सबसे अधिक नम्बर पाये थे !!

Related Stories

No stories found.
The News Agency
www.thenewsagency.in