नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: भक्त के बेटे को YMCA इलाहाबाद में बांसुरी बजने का आमंत्रण और महाराज जी की लीला

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: भक्त के बेटे को YMCA इलाहाबाद में बांसुरी बजने का आमंत्रण और महाराज जी की लीला

मेरे पति सरकारी दौरे पर इलाहाबाद से बाहर थे । ईसाइयों का वाई० एम० सी० ए० में बड़े दिन का त्यौहार था । मेरे मझले लड़के (भारत भूषण तब केवल १३-१४ वर्ष की उम्र-प्राप्त) को उन्होंने बाँसुरी वादन के लिये आमन्त्रित किया था । मैंने बहुत मना किया रात में ५-६ मील दूर जाने को कि अकेली हूँ - आधी रात को लौटोगे सुनसान जाड़े की रात में मैं कुछ हो गया तो मैं क्या करूंगी आदि । पर वह जिद में अड़ा रहा ।

रोष में उसके सामने चाभी फेंक बोली - ताला लगाकर दे जाना मुझे दादा के घर ।” और चली गई महाराज जी के पास । जाडे की शाम के साढे सात बज चुके थे। कुछ देर बाद पन्नू जी तैयार होकर वहीं आ गये और महाराज जी को प्रणाम कर चाभी मुझे देने लगे तो मैंने महाराज जी से (इस आशा से कि वे खुद मना कर देंगे पन्नू को) शिकायत की कि, "महाराज ! ये यहाँ हैं नहीं और यह ५-६ मील दूर इतनी रात को जा रहा है ईसाइयों के बीच बाँसुरी बजाने । सुनसान रास्ते में कुछ हो गया तो मैं क्या करूंगी अकेले ? इसे मना कर दीजिए" - आदि आदि ।

तब महाराज जी ने पन्नू से ही पूछा, “कहाँ जा रहे हो ?" उसने बताया तो बोले, "जाओ, जल्दी आना। तुम्हारी माँ को चिन्ता होगी 1" अब तक डरा हुआ पन्नू अति प्रसन्नता से महाराज जी को प्रणाम कर भाग लिया । महाराज जी की इस लीला को सभी उपस्थित लोग देखते रह गये । बाबा जी के इस अप्रत्याशित आचरण से मैं भी हतप्रभ हो गई । तभी महाराज जी ने कुछ झुककर मुझसे कहा, "ये क्या कम है कि बता कर जा रहा है ?" इस पर वहाँ उपस्थित कुछ रिश्तेदारान हँस दिये । तब महाराज जी उनकी तरफ देखकर कुछ रोष से बोले, "हँस क्या रहे हो ? इसके तो बताकर जायेंगे पर तुम्हारे बाहर से ताला मारकर सिनेमा देखने चले जायेंगे । तुम सोते रह जाओगे !!

कालान्तर में हुआ भी ऐसा ही । नई पीढ़ी के नवयुवकों की मानसिकता का ऐसा व्यावहारिक ज्ञान केवल बाबा जी महाराज को ही हो सकता था । दादा से कहा भी था, "दादा, जवानी पर किसी का जोर नही । इनसे ज्यादा न बोलना - तुमको भी मारेंगे और मुझको भी !!" और भी कि "अक्कल और उमर की भेंट नहीं होती कभी ।"

उस दिन चिन्तित-सी मैं रात ६ : ४५ पर घर पहुँची तो पाया कि पन्नू भी पहुँच गया थोड़ी देर में । उसका बाँसुरी वादन अन्य कलाकारों के देर में पहुँचने के कारण पहले ही हो गया और महाराज की उक्त लीला से प्रभावित हो वह अन्य आइटम देखने का विचार त्याग शीघ्र घर वापिस आ गया !! महाराज जी ने पन्नू की बात भी रख ली और मुझे भी शाँति दिलवा दी । (रमा जोशी )

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