नीब करोली बाबा की अनंत कथाएँ: दुष्ट शरन आन जब परई । पूरन इच्छा उनकी करई

नीब करोली बाबा की अनंत कथाएँ: दुष्ट शरन आन जब परई । पूरन इच्छा उनकी करई

"दादा हम क्या करे, हमें दया आ जाती है - दादा मुखर्जी से बात करते हुए बाबा ने कहा क्योंकि दया के अवतार थे बाबा । किसी का दुःख नहीं देख सकते थे बाबा । जन जन के लिये उनके ह्रदय में दया ही दया थी । दया ही तो क्षमा की जननी है । इसलिये बड़े से बड़े अपराध भी बाबा जी क्षमा कर देते थे ।उनके स्वंय को कोई अपमान कर देता था तो भी वो बुरा न मानते थे

लेकिन परन्तु एक अपराध उनको भी क्षम्य नहीं था- वे था भक्त के प्रति किया गया अपराध - जो भक्तन से बैर करत है, सो बैरी निज मेरो । ऐसे अपराधी के बाबा जी के दरबार से ही निष्कासित कर दिया जाता था ।

परन्तु " हरि रूठे गुरू ठोर है, गुरू रूठे नहीं ठौर ।" के भी विपरीत उन्हें छोड़ते न थे सदा परोक्ष रूप से उनका भी पीछा करते रहते थे । उनका योगक्षेम भी वहन किया करते, रक्षा करते रहते थे उनकी । और कहते," जिसका हाथ मै पकड़ लेता हूँ , उसे मैं कभी नहीं छोड़ता ।"

अन्नत कथामृत

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