नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: मुद्रा-सृजन

नीब करौरी बाबा की अनंत कथाएँ: मुद्रा-सृजन

द्रव्य में वृद्धि कर देने की तथा द्रव्य-सृजन की अनेक लीलायें हैं। बटुए में एक हजार मिल जाता किसी को तो किसी को बाबा जी के कम्बल से सैकड़ों रुपये । महासमाधि के बाद भी केहर सिंह जी को अपने बटुए में पहले दो सौ, फिर कुछ देर बाद छ: सौ, और पुनः पाँच सौ रूपये और मिल गये !!

घटना वृन्दावन आश्रम की है जहाँ वे कुछ चिन्तित हो उठे थे कि अब उनके पास केवल १५०) रुपये बचे हैं । (उनके रुपये हरदोई बैंक में रहते हैं ।) ऐसे ही टैगोर टाउन (इलाहाबाद) के तब धनाभाव से ग्रस्त, और उस विशेष अवसर पर चिन्तित कि बाबा जी के साथ जा रहा हूँ गाँठ में कुछ भी नहीं है श्री सुरेश चन्द्र पंत को भी एक पत्थर उठा लाने का आदेश पालन करने पर बाबा जी ने पंत जी के उठाये पत्थर के नीचे करेंसी नोट दिलवा दिये ।

श्री धाम कैंची में धर्मशाला की छत पर विराजे महाराज जी के दर्शन को जब श्री नन्द लाल जी हल्द्वानी से मन में कुछ असमंजस लिये कि आश्रम पर चढ़ी घी की पुरानी देनदारी के लिये भी कहा जाये कि नहीं – पहुँचे, तभी बाबा जी ने अपने कम्बल से ग्यारह सौ के नये नोट निकाल उन्हें देते हुये पूछा, “और कितना बाकी है घी का ?”

“दौ सौ और हैं, महाराज जी ?” और नीचे आश्रम में पहुँचकर नन्द लाल जी को पुनः कम्बल से दो नये नोट और निकाल कर दे दिये !! (प्रसंगवश तब श्री नन्द लाल जी बाबा जी के प्रति इतने समर्पित नहीं थे, जितने अब हैं ।)

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